राँची में 80 लाख की विदेशी शराब का रहस्य: फैक्ट्री के बाहर से 1100 पेटी लदा ट्रक गायब, चालक का मोबाइल बंद; ट्रांसपोर्टर और पत्नी के आवेदन से उलझी कहानी

–परमिट नहीं बनने पर फैक्ट्री के बाहर खड़ा किया गया था ट्रक, अगले दिन निर्धारित स्थान से हुआ गायब; ट्रांसपोर्टर ने ट्रक मालिक और चालक पर जताया संदेह, पत्नी ने पति के लापता होने की दी सूचना

राँची। राजधानी राँची के तुपुदाना स्थित शराब फैक्ट्री से बोकारो भेजने के लिए लोड की गई करीब 80 लाख रुपये की विदेशी शराब रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गई। शराब की 1100 पेटियों से लदा ट्रक फैक्ट्री के बाहर खड़ा था, लेकिन अगले दिन जब उसे बोकारो रवाना करने की तैयारी हुई तो ट्रक अपनी जगह से गायब मिला। हैरानी की बात यह है कि ट्रक के साथ उसका चालक भी लापता है और उसका मोबाइल फोन लगातार बंद मिल रहा है। इस मामले ने शराब परिवहन व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि एक तरफ ट्रांसपोर्टर ने ट्रक मालिक और चालक की भूमिका पर संदेह जताते हुए शिकायत की है, वहीं दूसरी तरफ चालक की पत्नी ने भी पति के लापता होने की सूचना पुलिस को दी है। दोनों आवेदनों के सामने आने के बाद पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि आखिर 1100 पेटी शराब लेकर ट्रक कहां चला गया और चालक के गायब होने के पीछे क्या वजह है।

परमिट के इंतजार में रातभर खड़ा रहा ट्रक

एफआईआर में दर्ज विवरण के मुताबिक, ट्रांसपोर्टर की कंपनी बेलकम इंटरप्राइजेज का यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड के साथ शराब परिवहन का एकरारनामा है। कंपनी की ओर से बोकारो स्थित जेएसबीसीएल को शराब भेजने का ऑर्डर मिला था। इसी के तहत ट्रक संख्या JH01CA-8807 को 29 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 8:30 बजे तुपुदाना स्थित अजंता बॉटलर्स एंड ब्लेंडर्स प्राइवेट लिमिटेड परिसर में लोडिंग के लिए बुलाया गया था।

एफआईआर के अनुसार, ट्रक में रॉयल चैलेंज फाइनस्ट प्रीमियम व्हिस्की और मैकडॉवेल्स नंबर-1 लग्जरी ब्लेंडेड व्हिस्की की कुल 1100 पेटियां लोड की गई थीं। इनमें रॉयल चैलेंज की 750 पेटियां और मैकडॉवेल्स नंबर-1 की 350 पेटियां शामिल थीं। शराब की लोडिंग 29 अक्टूबर की रात करीब 10:45 बजे तक पूरी कर ली गई थी।

लेकिन इसी दौरान एक तकनीकी पेंच फंस गया। विभागीय पोर्टल में तकनीकी खराबी के कारण शराब परिवहन का ऑनलाइन परमिट जनरेट नहीं हो सका। एफआईआर में बताया गया है कि फैक्ट्री परिसर में अत्यधिक लोडिंग और अनलोडिंग वाहनों की आवाजाही के कारण ट्रांसपोर्ट कंपनी के प्रतिनिधि जीत कुमार को ट्रक बाहर खड़ा कराने के लिए कहा गया। चालक को निर्देश दिया गया कि आगे का आदेश मिलने तक ट्रक का इंजन बंद रखे और वहीं इंतजार करे।

30 अक्टूबर की शाम आया ट्रक रवाना करने का संदेश, लेकिन गाड़ी गायब!

एफआईआर में दर्ज घटनाक्रम के अनुसार, 30 अक्टूबर को सभी कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शाम करीब 4:45 बजे ट्रक को बोकारो स्थित जेएसबीसीएल के लिए रवाना करने की सूचना दी गई। इसके बाद कंपनी के प्रतिनिधि जीत कुमार को पता चला कि ट्रक निर्धारित स्थान पर मौजूद नहीं है।पहले आसपास के इलाके में खोजबीन की गई। इसके बाद ट्रांसपोर्ट कंपनी की ओर से चालक से संपर्क करने की कोशिश शुरू हुई। चालक के मोबाइल नंबर पर लगातार फोन किया गया, लेकिन फोन स्विच ऑफ मिला।

एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि चालक के परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की गई। परिजनों की ओर से बताया गया कि 30 अक्टूबर की शाम करीब पांच बजे तक संपर्क करने का प्रयास हुआ था, लेकिन इसके बाद चालक से बात नहीं हो सकी। अन्य लोगों के माध्यम से भी फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, मगर सफलता नहीं मिली।

ट्रक मालिक और चालक की भूमिका पर संदेह

ट्रांसपोर्टर ने अपने आवेदन में ट्रक मालिक और चालक की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए आशंका जताई है कि दोनों की मिलीभगत से शराब लदा ट्रक गायब किया गया हो सकता है। हालांकि, यह आरोप है और इसकी पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही हो सकेगी।

इधर, ट्रक चालक नागेंद्र सिंह की पत्नी अंबिका देवी ने भी तुपुदाना ओपी में अलग से आवेदन देकर पति के लापता होने की शिकायत की है। उनके अनुसार, 29 अक्टूबर की रात करीब 11:30 बजे पति से बातचीत हुई थी। उन्होंने बताया था कि वह यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड के बाहर ट्रक खड़ा कर शराब लोड करवा रहे हैं। कंपनी की ओर से उस दिन चालान नहीं मिलने की बात भी कही गई थी। इसके बाद 30 अक्टूबर से पति से कोई संपर्क नहीं हो पाया।

एक तरफ पत्नी अपने पति के लापता होने की बात कह रही है, तो दूसरी तरफ ट्रांसपोर्टर शराब से लदे ट्रक के गायब होने को लेकर संदेह जता रहा है। ऐसे में जांच का दायरा केवल शराब की बरामदगी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ट्रक के फैक्ट्री से बाहर निकलने के बाद उसकी गतिविधियों और चालक के मोबाइल की आखिरी लोकेशन का पता लगाना भी अहम होगा।

 

मामले में 31 अक्टूबर 2026 को तुपुदाना ओपी में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। एफआईआर में जांच की जिम्मेदारी एसआई शशिकांत कुमार को सौंपी गई है। पुलिस अब ट्रक के दस्तावेज, परिवहन एकरारनामा, ड्राइविंग लाइसेंस, टैक्स इनवॉयस, रोड परमिट और अन्य संबंधित कागजात के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि परमिट नहीं बनने के कारण फैक्ट्री के बाहर खड़ा किया गया 1100 पेटी शराब लदा ट्रक आखिर कहां गायब हो गया? क्या यह सुनियोजित तरीके से शराब गायब करने का मामला है या चालक के लापता होने के पीछे कोई दूसरी वजह है? करीब 80 लाख रुपये की शराब और ट्रक का रहस्य अब पुलिस की जांच पर टिका है।

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