पशु तस्करी का खेल या वसूली का नेटवर्क?झारखण्ड में गाड़ियों की एंट्री के अलग-अलग रेट का दावा, हजारीबाग से बंगाल बॉर्डर तक कनेक्शन की चर्चा
राँची। झारखण्ड में एक बार फिर बड़े पैमाने पर पशु तस्करी की गतिविधियां संचालित होने की चर्चा सामने आई है। इस बार मामला केवल पशुओं के परिवहन तक सीमित नहीं बताया जा रहा, बल्कि गाड़ियों की एंट्री के नाम पर कथित रूप से लाखों रुपये के लेन-देन का दावा भी किया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, 10 चक्का वाहन की एंट्री के लिए 1 लाख 5 हजार रुपये, 12 से 16 चक्का वाहनों के लिए 1 लाख 80 हजार रुपये, कंटेनर के लिए 2 लाख 25 हजार रुपये और पिकअप वाहन के लिए 60 हजार रुपये दिया जाता है। दावा किया गया है कि यह दर झारखण्ड के चोरदाहा सीमा से पश्चिम बंगाल की सीमा तक गाड़ियों की एंट्री से जुड़ी है।
चार जिलों तक नेटवर्क फैले होने का दावा
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क का संचालन हजारीबाग, बरही, बाराचट्टी और धनबाद से जुड़े क्षेत्रों के माध्यम से किए जाने की बात कही जा रही है। इसमें छह लोगों की संलिप्तता का दावा किया गया है। सूत्रों ने नईम नाम के व्यक्ति को कथित तौर पर नेटवर्क का सरगना बताया है। यह भी दावा है कि गाड़ियों की एंट्री उसके नाम से कराई जा रही है।
सीमा से गुजरने वाली गाड़ियों की जांच पर सवाल
यदि रेट सूची और नेटवर्क से जुड़े दावे सही हैं, तो यह गंभीर जांच का विषय है कि पशुओं से लदी गाड़ियों को किन रास्तों से ले जाया जा रहा है और सीमा क्षेत्रों में उनकी जांच किस तरह हो रही है। चोरदाहा से बंगाल सीमा तक कथित एंट्री व्यवस्था के दावे ने संबंधित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
अब जरूरत है कि पुलिस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करे, गाड़ियों की आवाजाही और कथित लेन-देन की पड़ताल करे तथा यदि अवैध गतिविधियों में किसी की संलिप्तता मिलती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई करे।

