गम्हरिया थाना में महिला से दुष्कर्म पर बाबूलाल मरांडी का सरकार और पुलिस महकमे पर हमला, बोले- जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो महिलाएं सुरक्षा की उम्मीद किससे करें?
राँची।सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया थाना परिसर में महिला के साथ पुलिसकर्मी द्वारा कथित दुष्कर्म की घटना ने झारखण्ड की कानून-व्यवस्था और पुलिस महकमे की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले को लेकर झारखण्ड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से राज्य सरकार, पुलिस मुख्यालय और डीजीपी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले ही वर्दी की आड़ में ऐसी घिनौनी हरकत करेंगे, तो महिलाएं आखिर सुरक्षा की उम्मीद किससे करेंगी?
बाबूलाल मरांडी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि सरायकेला के गम्हरिया थाना परिसर में महिला के साथ पुलिसकर्मी द्वारा दुष्कर्म की घटना अत्यंत शर्मनाक और चिंताजनक है। उन्होंने इस घटना को झारखण्ड की पुलिस व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी बताते हुए कहा कि इससे पहले बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में भी एक महिला कैदी के यौन शोषण और गर्भवती होने का मामला सामने आ चुका है। ऐसे मामलों के सामने आने से जेल और थानों जैसे सुरक्षित माने जाने वाले सरकारी परिसरों में महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि जब जेल के भीतर महिला कैदी सुरक्षित नहीं हैं और थाने के परिसर में भी महिला के साथ ऐसी घटना हो रही है, तो आम महिलाएं अपनी सुरक्षा के लिए आखिर कहां जाएं? उन्होंने कहा कि पुलिस और जेल प्रशासन पर महिलाओं की सुरक्षा की विशेष जिम्मेदारी होती है। यदि इसी व्यवस्था से जुड़े लोग ही अपने पद और वर्दी का दुरुपयोग करेंगे, तो आम जनता का कानून और पुलिस प्रशासन पर भरोसा कैसे कायम रहेगा?
मरांडी ने डीजीपी तदाशा मिश्रा को भी निशाने पर लेते हुए उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया और पुलिस व्यवस्था में सुधार को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिला डीजीपी होने के बावजूद महिलाओं के साथ दुष्कर्म और यौन शोषण की घटनाएं सामने आना बेहद चिंताजनक है। कम से कम थानों और जेलों जैसे संवेदनशील परिसरों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए थी।
डीजीपी की कार्यशैली पर भी उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने अपनी पोस्ट में डीजीपी तदाशा मिश्रा की तुलना पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता से करते हुए आरोप लगाया कि महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था में सुधार के बजाय पुलिस नेतृत्व अवैध वसूली, उगाही और अन्य गतिविधियों में उलझा हुआ प्रतीत होता है। ये नेता प्रतिपक्ष के राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर संबंधित पुलिस नेतृत्व का पक्ष अलग से महत्वपूर्ण होगा।उन्होंने सरायकेला के पुलिस अधीक्षक से इस मामले में दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
पुलिसिंग व्यवस्था के लिए भी गंभीर सवाल
गम्हरिया थाना परिसर से जुड़ा यह मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रह गया है। इसने पुलिस थानों में महिलाओं की सुरक्षा, हिरासत एवं पूछताछ के दौरान निगरानी, महिला सुरक्षा प्रोटोकॉल और पुलिसकर्मियों की जवाबदेही जैसे अहम मुद्दों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।अब सवाल यह है कि पुलिस महकमा इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ थानों एवं जेलों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

