SIR में बड़ा खुलासा: मिता देवी को फातिमा बीबी बताकर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का आरोप, वंशावली पर उठे सवाल; निर्वाचन विभाग ने मांगी रिपोर्ट..

 

साहिबगंज। झारखण्ड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान साहिबगंज के बरहेट विधानसभा क्षेत्र से सामने आया एक मामला प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा रहा है। यहां एक ही आधार नंबर से जुड़े दस्तावेजों में महिला के दो अलग-अलग नाम और पहचान सामने आने का आरोप है। मामला केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि वंशावली प्रमाण-पत्र में पिता के नाम और पारिवारिक संबंधों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायत में मिता देवी और फातिमा बीबी को एक ही महिला बताया गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखण्ड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने साहिबगंज के जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की जांच और अनुवर्ती कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। निर्वाचन विभाग के 30 अक्टूबर 2026 के पत्र के बाद जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। अब संबंधित दस्तावेजों की दोबारा जांच और कथित फर्जी वंशावली तैयार करने में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

निर्वाचन पदाधिकारी के पत्र में चार बड़े सवाल

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की ओर से जारी पत्र में शिकायत के आधार पर चार बिंदुओं को गंभीरता से उठाया गया है।

1.नाम में अंतर: शिकायत के अनुसार, फातिमा बीबी का पूर्व नाम मिता देवी है। उनके पुराने आधार कार्ड में मिता देवी नाम दर्ज था।

2.पिता के नाम में बदलाव: बरहेट के अंचल अधिकारी द्वारा जारी वंशावली प्रमाण-पत्र संख्या 1247/2026, दिनांक 23 सितंबर 2026 में फातिमा बीबी को नेजामुद्दीन मोमिन की पुत्री दर्शाया गया है। जबकि शिकायत में उनके पिता का नाम जालश रंजन दत्ता बताया गया है।

3.एक आधार नंबर, दो नाम: पत्र में उल्लेख है कि मिता देवी और फातिमा बीबी के नाम से जुड़े दस्तावेजों में आधार संख्या 380365619507 समान है। सक्षम प्राधिकार से सत्यापन कराने पर बायोमेट्रिक एंट्री भी एक ही पाई गई।

4.वंशावली पर सवाल: मिता देवी, पिता जालश रंजन दत्ता को नेजामुद्दीन मोमिन की पुत्री के रूप में वंशावली में कैसे दर्शाया गया, यही शिकायत का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने प्रथम दृष्टया संलग्न वंशावली को फर्जी प्रतीत होने की बात भी पत्र में दर्ज की है।

अब किन पर गिर सकती है गाज?

निर्वाचन विभाग के पत्र में जिला प्रशासन से शिकायत में वर्णित तथ्यों और संलग्न दस्तावेजों की सम्यक जांच कर आगे की कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट मांगी गई है। इसके बाद जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं।

प्रशासनिक स्तर पर कथित वंशावली तैयार करने और उसे प्रमाणित करने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है। इसमें संबंधित राजस्व कर्मियों, अंचल कार्यालय और प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। शिकायत में शामिल दस्तावेजों की सत्यता प्रमाणित होने पर प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई की तैयारी की बात भी सामने आई है।हालांकि, अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि वंशावली किस स्तर पर तैयार हुई, किसने उसमें नाम दर्ज किया और किन अधिकारियों ने दस्तावेजों का सत्यापन किया।

SIR में पहले भी फर्जी प्रमाण-पत्र का मामला, आठ लोगों पर FIR

साहिबगंज जिले में SIR प्रक्रिया के दौरान फर्जी दस्तावेजों का मामला पहले भी सामने आ चुका है। शिकायत के अनुसार, रूबेदा बीबी, रूबी शेख, पिंटू शेख, सेंटू शेख, मंजारूल आलम, रीना खातून (सोलेमान शेख), रीना खातून (मंजूर शेख) और मोहम्मद शमीम समेत आठ लोगों के खिलाफ फर्जी प्रमाण-पत्र से जुड़े मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।लेकिन सवाल है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद आरोपियों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई हुई? क्या पुलिस जांच पूरी हुई या मामला अब भी लंबित है? बरहेट के नए प्रकरण के बाद पुराने मामलों की जांच और कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने उठाया मामला

इस प्रकरण पर गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने भी रविवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर राहुल गांधी, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और निर्वाचन आयोग का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बरहेट विधानसभा क्षेत्र में कथित फर्जी वंशावली के आधार पर मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के मामले को उठाया।

सांसद ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि इस तरह के दस्तावेजों के सहारे बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय नागरिक और मतदाता बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने इसे चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की। वहीं, सांसद ने अपने एक अन्य संदेश में भी मतदाता सूची में पिता के नाम और वंशावली से जुड़ी विसंगतियों की निष्पक्ष एवं गहन जांच कराने की मांग की है।

सबसे बड़ा सवाल: SIR में दस्तावेजों की जांच किसने की?

बरहेट का यह मामला अब कई स्तरों पर जांच की मांग कर रहा है। यदि एक ही आधार नंबर पर दो अलग-अलग नामों से दस्तावेज तैयार हुए और बायोमेट्रिक पहचान भी एक ही निकली, तो इन दस्तावेजों के आधार पर वंशावली कैसे तैयार हुई? अंचल कार्यालय ने पिता के नाम की पुष्टि किन अभिलेखों के आधार पर की? ग्राम स्तर से लेकर अंचल स्तर तक दस्तावेजों का सत्यापन किसने किया?

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाना है। ऐसे में यदि जांच में फर्जी दस्तावेजों के सहारे मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की पुष्टि होती है, तो यह केवल एक व्यक्ति के नाम का विवाद नहीं रहेगा, बल्कि दस्तावेजों के सत्यापन और निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर मामला बन जाएगा।अब निगाहें जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ मिता देवी और फातिमा बीबी की पहचान का नहीं, बल्कि उस पूरी प्रक्रिया का है, जिसके जरिए कथित तौर पर एक ही आधार नंबर और अलग-अलग पारिवारिक पहचान के दस्तावेज निर्वाचन प्रक्रिया तक पहुंच गए।क्या अब मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी का 30 अक्टूबर 2026 का पत्र एवं उपलब्ध शिकायत संबंधी विवरण। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही सामने आएगा।ये भी बड़ा सवाल है।

error: Content is protected !!