मानवता की अनूठी मिसाल: मुक्ति संस्था ने जुमार नदी तट पर किया 36 अज्ञात शवों का ससम्मान अंतिम संस्कार,अबतक 2189 शवों का संस्कार…

राँची।राजधानी राँची में मानवता और सेवा की एक और मर्मस्पर्शी तस्वीर सामने आई है। आज, रविवार को ‘मुक्ति संस्था’ द्वारा पूरे विधि-विधान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ 36 अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार जुमार नदी तट पर किया गया। समाज द्वारा बिसरा दिए गए इन शवों को संस्था के सदस्यों ने अपना मानकर उन्हें सम्मानजनक विदाई दी।

​रिम्स मोर्चरी से जुमार नदी तक का सफर

रविवार सुबह मुक्ति संस्था के सदस्य राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) के मोर्चरी गृह (शवगृह) पहुंचे। वहाँ से सभी 36 अज्ञात शवों को सलीके से बाहर निकाला गया और पूरी तरह पैक कर जुमार नदी के तट पर ले जाया गया। नदी तट पर पूरे वैदिक और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की गई।

​अध्यक्ष प्रवीण लोहिया ने दी मुखाग्नि, अब तक 2189 शवों का संस्कार

​परंपरा के अनुसार, मुक्ति संस्था के अध्यक्ष प्रवीण लोहिया ने इन अज्ञात शवों को मुखाग्नि दी। इस भावुक क्षण पर जानकारी देते हुए अध्यक्ष प्रवीण लोहिया ने बताया कि “मुक्ति संस्था पिछले लंबे समय से इस सेवा कार्य में जुटी है। आज के संस्कार को मिलाकर संस्था द्वारा अब तक कुल 2,189 अज्ञात शवों का पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया जा चुका है। हमारा उद्देश्य हर लावारिस शव को एक ससम्मान विदाई देना है।”

​अंतिम संस्कार के समापन पर सभी दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए परमजीत सिंह टिंकू द्वारा अंतिम अरदास की गई।

​सेवा कार्य में शामिल रहे संस्था के सदस्य

​इस पुनीत और संवेदनशील कार्य को सफल बनाने में मुक्ति संस्था के कई कर्मठ सदस्य मौके पर उपस्थित रहे, जिन्होंने इस सेवा में अपना योगदान दिया:

​रवि अग्रवाल
​संदीप पपनेजा
​हरीश नागपाल
​आर के गांधी
​आदित्य शर्मा
​सुमित अग्रवाल
​राहुल चौधरी
​सीताराम कौशिक
​अरुण कुतरियार
​संजय गोयल
​उज्ज्वल जैन
​वीरेंद्र कुमार गुप्ता
​सौरभ बथवाल
​अमित अग्रवाल
​विजय धानुका
​राहुल जायसवाल
​राजा गोयनका
​पंकज मिढ़ा
​कमल चौधरी
​बलबीर जैन
​मोती सिंह

​मुक्ति संस्था का यह निस्वार्थ प्रयास समाज के लिए एक प्रेरणा है, जो यह याद दिलाता है कि जीवन के अंत के बाद भी हर इंसान सम्मान का हकदार है।

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