‘मिशन अमानत’ की पहली कामयाबी: 505 मोबाइल लौटाकर धनबाद पुलिस ने जीता दिल

धनबाद।किसी के चेहरे पर आठ साल बाद खोई हुई चीज मिलने की खुशी थी, तो कोई अपने मोबाइल को फिर से हाथ में लेकर भावुक हो उठा। धनबाद पुलिस लाइन के नवनिर्मित सभागार में शनिवार को ऐसा ही भावनात्मक माहौल देखने को मिला, जब धनबाद पुलिस के ‘मिशन अमानत’ के तहत 505 गुम और चोरी हुए मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को सौंपे गए।

यह पहल वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार की पहल पर शुरू की गई है। सीईआईआर (CEIR) पोर्टल की मदद से देश के विभिन्न राज्यों से बरामद किए गए मोबाइल उपायुक्त आदित्य रंजन, एसएसपी प्रभात कुमार, ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब, उप विकास आयुक्त सन्नी राज और डीएफओ विकास पालीवाल औऱ डीएसपी प्रकाश सोय सहित अन्य पुलिस अधिकारी संयुक्त रूप से लोगों को लौटाए।

समारोह में कई ऐसे लोग भी पहुंचे, जिनकी उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी थीं। किसी का मोबाइल दो साल पहले खोया था तो किसी को करीब आठ वर्ष बाद अपना मोबाइल वापस मिला। जैसे ही उनके हाथों में उनकी पुरानी अमानत पहुंची, सभागार तालियों और मुस्कानों से गूंज उठा।
उपायुक्त आदित्य रंजन ने इस पहल को धनबाद पुलिस की जनहित में उठाया गया ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि आज मोबाइल केवल बातचीत का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों की पहचान, जरूरी दस्तावेज, बैंकिंग और निजी जानकारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में उसे सुरक्षित वापस दिलाना संवेदनशील और तकनीक आधारित पुलिसिंग का बेहतरीन उदाहरण है।
एसएसपी प्रभात कुमार ने घोषणा की कि ‘मिशन अमानत’ अब एक नियमित अभियान होगा। हर माह की 25 तारीख को बरामद मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को लौटाए जाएंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि मोबाइल गुम होने या चोरी होने पर तुरंत सीईआईआर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं या नजदीकी थाना को सूचना दें, ताकि मोबाइल का दुरुपयोग रोका जा सके और उसकी बरामदगी की संभावना बढ़े।
एसएसपी ने यह भी बताया कि मोबाइल बरामदगी अभियान के दौरान पुलिस को एक अंतरराष्ट्रीय मोबाइल चोर गिरोह से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। इस नेटवर्क की जांच के लिए विशेष टीम काम कर रही है और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा कर आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने कहा कि यह अभियान सिर्फ मोबाइल लौटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों का पुलिस पर भरोसा मजबूत करने और अपराधियों के हाथों में मोबाइल पहुंचने से रोकने की दिशा में भी बड़ी सफलता है।
‘मिशन अमानत’ की पहली ही कड़ी ने यह साबित कर दिया कि यदि तकनीक और संवेदनशील पुलिसिंग साथ चलें तो वर्षों पुरानी खोई हुई अमानत भी अपने असली मालिक तक सुरक्षित पहुंच सकती है। 505 मोबाइल की वापसी के साथ धनबाद पुलिस ने न सिर्फ लोगों की संपत्ति लौटाई, बल्कि उनके चेहरे की मुस्कान भी वापस कर दी।

