ट्रेजरी घोटाले की जांच तेज, सीआईडी ने दो नए केस दर्ज किए

 

राँची। झारखण्ड के चर्चित ट्रेजरी घोटाले में अब जांच का फोकस सिर्फ अवैध निकासी से आगे बढ़कर एक संभावित “वेतन बिल सिंडिकेट” की ओर जा रहा है। अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने राँची और रामगढ़ के दो नए मामलों को टेकओवर करते हुए यह संकेत दे दिया है कि अलग-अलग जिलों में सामने आए ये केस महज अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि एक संगठित पैटर्न का हिस्सा हो सकते हैं। इन दो नए मामलों के जुड़ने के बाद अब सीआईडी के पास कुल पांच केस हो गए हैं, जिनकी जांच एक साथ आगे बढ़ाई जा रही है।

अब तक बोकारो, हजारीबाग और चाईबासा में एसपी कार्यालयों के जरिए फर्जी निकासी का मामला सामने आया था, लेकिन राँची और रामगढ़ में पशुपालन विभाग के अंदर वेतन मद में हेरफेर का खुलासा होने के बाद जांच एजेंसियों को यह शक गहरा गया है कि सरकारी भुगतान प्रणाली को निशाना बनाकर सुनियोजित तरीके से रकम निकाली जा रही थी।

राँची के कांके स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन में करीब 2.94 करोड़ रुपये की निकासी ने इस पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वेतन विपत्रों में छेड़छाड़ कर कुबेर पोर्टल के जरिए राशि को निजी खातों में ट्रांसफर किया गया। इस मामले में एक आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि दूसरा फरार है। अब सीआईडी की एसआईटी गिरफ्तार आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। इस पूछताछ को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि क्या यह काम सिर्फ दो लोगों तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है, जो अलग-अलग जिलों में एक जैसे तरीके से काम कर रहा था।

रामगढ़ में भी पशुपालन विभाग के भीतर करीब 34.25 लाख रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आ चुका है। विभागीय ऑडिट में यह साफ हुआ है कि वेतन और अन्य मदों में फर्जी भुगतान किया गया और इसमें विभागीय स्तर पर मिलीभगत की आशंका है। इस केस को अपने हाथ में लेने के बाद सीआईडी अब सिर्फ लेनदेन की जांच नहीं करेगी, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि क्या यहां इस्तेमाल किया गया तरीका रांची और अन्य जिलों से मेल खाता है।

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