पलामू में 13 साल के थे दूल्हा-दुल्हन, बीडीओ की त्वरित कार्रवाई, रोकवाया बाल विवाह…गुमला में नाबालिग को बालिका वधु बनने से रोका

13 साल के थे दूल्हा-दुल्हन, बीडीओ की त्वरित कार्रवाई कर रोकवाया बाल विवाह

पलामू।जिले के छतरपुर प्रखंड क्षेत्र की हुलसम पंचायत के पाटादोहर गांव में प्रशासन की सजगता से गुरुवार को एक बाल विवाह रोक गया है।बीडीओ आशीष कुमार साहू त्वरित कार्रवाई करते हुए 13 साल के दूल्हा-दुल्हन की शादी रोकी गयी।बीडीओ ने बताया कि गुप्त सूचना मिली थी कि पाटादोहर गांव में एक नाबालिग जोड़े की शादी करायी जा रही है।सूचना की गंभीरता को देखते दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और मौजूद परिजनों से आयु संबंधी दस्तावेज मांगी गयी, तो स्थिति चौंकाने वाली निकली। जांच में पाया गया कि लड़के की उम्र 13 वर्ष सात माह और लड़की की उम्र महज 13 वर्ष है।लड़का लातेहार जिले के मनिका प्रखंड के कोपे गांव का रहने वाला है।जबकि लड़की छतरपुर के पाटादोहर गांव की है।इसके बाद विवाह की रस्मों को रुकवाया गया।बीडीओ ने बताया कि बाल विवाह कानून का उल्लंघन करने के आरोप में लड़की के माता-पिता को अग्रतर कार्रवाई के लिए जिला बाल संरक्षण इकाई के सुपुर्द कर दिया गया है।बीडीओ ने ग्रामीणों को समझाते हुए कहा कि बाल विवाह समाज के लिए एक अभिशाप है, जो बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।उन्होंने अपील की कि यदि प्रखंड क्षेत्र में कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले, तो तुरंत पुलिस या प्रखंड प्रशासन को सूचित करें ताकि समय रहते मासूमों का भविष्य बचाया जा सके।

 

चैनपुर में मंडप तक पहुंची पुलिस, नाबालिग को बालिका वधू बनने से रोका

गुमला।झारखण्ड के गुमला जिला अंतर्गत चैनपुर प्रखंड प्रशासन और पुलिस की तत्परता से एक नाबालिग लड़की बालिका वधू बनने से बच गयी।चैनपुर थाना क्षेत्र में होने जा रहे एक बाल विवाह को प्रशासन ने रुकवा दिया गया है।कम उम्र की लड़की की शादी की सूचना मिलते ही प्रशासन की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को कानून का पाठ पढ़ाते हुए विवाह रुकवाया। जानकारी के अनुसार, चैनपुर के मालम पंचायत की एक नाबालिग लड़की का विवाह एक 25 वर्षीय युवक के साथ तय किया गया था।विवाह की रस्में चल रही थीं और घर में मेहमानों का तांता लगा हुआ था।इसी बीच प्रशासन को गुप्त सूचना मिली कि लड़की की उम्र शादी के लिए निर्धारित कानूनी उम्र से कम है। मौके पर पहुंची महिला पर्यवेक्षाका अंजली वर्मा, एएसआइ संतोष धर्मपाल लुगुन, पंचायत प्रतिनिधि सहित अन्य अधिकारी ने ग्रामीणों और दोनों परिवारों को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह एक गंभीर अपराध है।उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यह विवाह संपन्न होता है, तो न केवल दूल्हा-दुल्हन के परिवार, बल्कि इसमें शामिल होने वाले मेहमान, पंडित, टेंट और बाजा वाले भी कानूनी रूप से दोषी माने जायेंगे और उन्हें जेल की सजा हो सकती है। प्रशासन और पुलिस के समझाने के बाद दोनों पक्षों ने अपनी गलती स्वीकार की। लड़के के परिजनों ने लिखित आश्वासन दिया कि वे अभी शादी नहीं करेंगे और लड़की के बालिग 18 वर्ष होने के बाद ही यह विवाह संपन्न होगा। फिलहाल लड़की को उसके घर भेज दिया गया है और प्रशासन लगातार मामले पर नजर बनाये हुए है। प्रशासन ने क्षेत्र के लोगों से अपील किया है कि वे बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से मिटाने में सहयोग करें।यदि कहीं भी इस तरह की घटना की जानकारी मिले, तो तुरंत चैनपुर प्रखंड प्रशासन या चैनपुर थाना को सूचित करें।

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