हेमंत सोरेन को कोर्ट से झटका, मनी लॉन्ड्रिंग केस से राहत नहीं; ट्रायल का रास्ता साफ
राँची झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कथित भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। राँची की विशेष पीएमएलए अदालत ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के साथ ही उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही जारी रहेगी और मामला अब ट्रायल की दिशा में आगे बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री की ओर से अदालत में दायर याचिका में मांग की गई थी कि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें मामले से मुक्त किया जाए। इस पर दोनों पक्षों के बीच लंबी बहस हुई। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया था, जिस पर सोमवार को फैसला सुनाते हुए याचिका खारिज कर दी गई।
यह मामला राँची के बड़गाईं अंचल स्थित शांति नगर की 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग आरोपों से जुड़ा है। मामले की जांच Enforcement Directorate (ईडी) कर रही है। जांच एजेंसी ने अपनी जांच के आधार पर मुख्यमंत्री को आरोपी बनाया है।
सुनवाई के दौरान ईडी ने अदालत को बताया कि जांच में जुटाए गए दस्तावेज और साक्ष्य मामले की सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करते हैं। वहीं, मुख्यमंत्री पक्ष की ओर से दावा किया गया कि आरोप तथ्यहीन हैं और उन्हें अनावश्यक रूप से मामले में घसीटा गया है।
विशेष पीएमएलए कोर्ट के न्यायाधीश योगेश कुमार ने उपलब्ध रिकॉर्ड और आरोपों का अवलोकन करने के बाद कहा कि इस स्तर पर आरोपी को मामले से मुक्त करने का पर्याप्त आधार नहीं बनता। इसी के साथ डिस्चार्ज याचिका को खारिज कर दिया गया।
अदालत के इस आदेश के बाद अब मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी। कानूनी जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री के पास इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देने का विकल्प मौजूद है, लेकिन फिलहाल विशेष अदालत के आदेश ने उनके लिए कानूनी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

