दो साल बाद हत्या की पुष्टि: जमीन विवाद में ले जाकर टीपू मुंडा की कर दी थी हत्या…
राँची। गोंदा थाना क्षेत्र के टिकली टोला में दिसंबर 2023 में हुई टीपू मुंडा की मौत ने दो साल बाद नया मोड़ ले लिया है। जिस मामले को अब तक यूडी (अप्राकृतिक मौत) मानकर जांच की जा रही थी, वही अब हत्या में तब्दील हो गया है। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर साफ हो गया है कि टीपू मुंडा (47) की हत्या मुँह और नाक दबाकर दम घोंटने से की गई थी। इस खुलासे के बाद गोंदा थाना पुलिस ने यूडी कांड संख्या 01/2024 को हत्या के केस में बदलते हुए प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की शुरुआत मृतक की पत्नी पूनम देवी के उस फर्द बयान से हुई थी, जो उन्होंने 12 दिसंबर 2023 को रिम्स में दिया था। उन्होंने बताया था कि 11 दिसंबर 2023 की दोपहर करीब 1 बजे तीन अज्ञात लोग जमीन से जुड़ी बातचीत के बहाने उनके घर आए और उनके पति को अपने साथ ले गए। करीब ढाई बजे मोहल्ले के बच्चों से सूचना मिली कि टीपू मुंडा घर के पास इमली पेड़ के नीचे घायल अवस्था में पड़े थे। बाद में वही लोग उन्हें गाड़ी से रिम्स ले गए, जहां इलाज के दौरान दोपहर 3:27 बजे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
जांच में देर, लेकिन साक्ष्य बने निर्णायक
शुरुआती जांच में मौत के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए थे, जिसके कारण मामला यूडी केस के रूप में दर्ज रहा। लेकिन पोस्टमार्टम और बाद में आई हिस्टोपैथोलॉजी व डीएफएसएल रिपोर्ट ने पूरे मामले की तस्वीर बदल दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट (संख्या 3391/23) में शरीर पर कई चोटों, सिर पर गहरी लकीरेशन, शरीर पर खरोंच, होंठों के अंदर जख्म, आंखों में हेमरेज और नाखूनों के नीले पड़ने जैसे संकेत मिले थे, जो दम घुटने की ओर इशारा कर रहे थे।
फॉरेंसिक रिपोर्ट ने खोला राज
26 दिसंबर 2025 को रिम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि मौत “मुँह और नाक पर दबाव डालने से हुई एस्फिक्सिया” के कारण हुई। यानी यह एक सुनियोजित हत्या थी, जिसे शुरू में सामान्य मौत की तरह दिखाने की कोशिश की गई।

