दो सीटें, तीन दावेदार और कई संकेत; राज्यसभा चुनाव ने बढ़ाई सियासी बेचैनी

 

राँची।झारखण्ड की दो राज्यसभा सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का अखाड़ा बन गया है। तीन दिग्गज उम्मीदवारों में झामुमो के बैजनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और निर्दलीय परिमल नाथवाणी के मैदान में उतरने से सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है। तीनों प्रत्याशियों ने अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए दो-दो सेटों में नामांकन दाखिल कर चुनावी मुकाबले को रोमांचक बना दिया है।

सबसे ज्यादा चर्चा निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी को मिल रहे समर्थन की है। नाथवाणी के प्रस्तावकों की सूची ने झारखण्ड की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी समेत कई भाजपा विधायक उनके समर्थन में सामने आए हैं, वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन और सरयू राय जैसे नेता भी उनके प्रस्तावक बने हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि नाथवाणी ने सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाई है।

उधर, झामुमो प्रत्याशी बैजनाथ राम के नामांकन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद प्रस्तावक बने। उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ और युवा नेताओं की लंबी फौज दिखाई दी, जिससे झामुमो ने एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है।

वहीं कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के समर्थन में महागठबंधन पूरी ताकत के साथ उतरता नजर आया। उनके पहले सेट में कल्पना सोरेन प्रस्तावक बनीं, जबकि दूसरे सेट में कांग्रेस के कई वरिष्ठ विधायकों ने समर्थन देकर पार्टी की मजबूती का प्रदर्शन किया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में दोनों सीटों पर जीत का गणित भले स्पष्ट दिख रहा हो, लेकिन परिमल नाथवाणी को सत्ता और विपक्ष दोनों तरफ से मिला समर्थन भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं और नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है। नामांकन के दौरान सामने आई तस्वीरों ने यह संदेश दिया है कि झारखण्ड की राजनीति में पर्दे के पीछे कई नई रणनीतियां आकार ले रही हैं।

अब निगाहें मतदान और अंतिम परिणाम पर टिकी हैं, क्योंकि राज्यसभा की यह लड़ाई केवल सीटों की नहीं, बल्कि झारखण्ड की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत भी मानी जा रही है।

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