चेहरे पर नहीं, ज़िंदगी पर पड़ा था तेज़ाब का घाव; हाईकोर्ट ने दिलाई 15 लाख की राहत..
राँची।झारखण्ड हाईकोर्ट ने एसिड अटैक के पुरुष पीड़ित राहुल कुमार को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार को कुल 15 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि एसिड अटैक से होने वाली पीड़ा, शारीरिक क्षति और जीवनभर के मानसिक आघात का मूल्यांकन महज तीन लाख रुपये में नहीं किया जा सकता।
यह मामला वर्ष 2012 का है। उस समय राहुल अपने घर में पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान उनके 10 वर्षीय चचेरे भाई और पड़ोस के एक बच्चे के बीच विवाद हो गया। जब राहुल ने विवाद के दौरान एक महिला को अपशब्द कहने से रोका, तो गुस्से में महिला तेजाब लेकर आई और उनके चेहरे पर फेंक दिया। हमले में राहुल का चेहरा बुरी तरह झुलस गया। उनकी पलकों का हिस्सा नष्ट हो गया, दोनों कान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए और गर्दन, सीने व बाएं हाथ पर गहरे जख्म आए।
हमले के बाद राहुल की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। अब तक वे 14 प्लास्टिक सर्जरी करा चुके हैं। उनकी आंखों की रोशनी काफी प्रभावित हुई है और उन्हें 45 प्रतिशत दिव्यांगता का सामना करना पड़ रहा है। इलाज पर 25 लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुका है, जबकि आगे भी कई सर्जरी की जरूरत बनी हुई है।
राहुल की ओर से दायर लेटर्स पेटेंट अपील 1374 दिनों की देरी से दाखिल हुई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने माना कि एक एसिड अटैक पीड़ित के लिए लगातार इलाज, आर्थिक संकट और जीवन की चुनौतियां मुकदमेबाजी से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होती हैं। इसी आधार पर अदालत ने देरी को माफ कर सुनवाई की।
न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एसिड अटैक केवल शरीर या चेहरे को नहीं, बल्कि व्यक्ति की आत्मा और आत्मसम्मान को भी गहरी चोट पहुंचाता है। अदालत ने माना कि पहले दिया गया तीन लाख रुपये का मुआवजा पीड़ित की पीड़ा और पुनर्वास के लिए पर्याप्त नहीं था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य की मुआवजा योजनाओं में पुरुष और महिला एसिड अटैक पीड़ितों के लिए अलग-अलग प्रावधानों पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि तेजाब किसी व्यक्ति को उसके लिंग के आधार पर नुकसान नहीं पहुंचाता, इसलिए मुआवजा व्यवस्था में भी समानता होनी चाहिए। कोर्ट ने सरकार को योजना में संशोधन पर विचार करने का संकेत दिया।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पहले दिए जा चुके तीन लाख रुपये को छोड़कर शेष 12 लाख रुपये राहुल कुमार को आठ सप्ताह के भीतर दिए जाएं। साथ ही भविष्य में इलाज पर होने वाले वास्तविक खर्च का भुगतान भी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने पर शीघ्र किया जाए।अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि एसिड अटैक पीड़ितों का पुनर्वास और उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना एक कल्याणकारी राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

