रेस्टोरेंट कर्मी मनीष गोप हत्याकांड:कुख्यात शूटर सचिन यादव ने खोला राज…बरामद हुआ ‘जिगाना’ हथियार..शूटर ने रिमांड के दौरान गिरोह के सम्बंध में कई अहम जानकारियां दी !
राँची।राजधानी राँची के एयरपोर्ट थाना क्षेत्र स्थित होटल टीटॉस हुई गोलीबारी व हत्याकांड के मुख्य शूटर सचिन यादव को एयरपोर्ट पुलिस ने तीन दिनों का रिमांड पर लिया है।आज तीसरे दिन पूछताछ के बाद उसे फिर से जेल भेजा जाएगा।वहीं,सूत्रों से जानकारी मिली है कि रिमांड के दौरान पुलिस ने कुख्यात शूटर सचिन यादव से पूछताछ के बाद वो राज खुलवा लिया है,जो राज सचिन की गिरफ्तारी के बाद नहीं खुलवा पाए थे।पुलिस ने रिमांड के दौरान पूछताछ में सचिन द्वारा वारदात में जिस टर्की मेड जिगाना पिस्टल से फायरिंग की थी,उस पिस्टल को सचिन यादव के बताए ठिकाने से पुलिस ने बरामद कर लिया है।बता दें इस वारदात में एक बेगुनाह वेटर की जान चली गई थी।जिगाना एक अत्याधुनिक हथियार है जिससे पिछले कुछ समय में देश के कई हाई-प्रोफाइल हत्या में इस्तेमाल किया गया था।जिगाना (Zigana) एक तुर्की अर्ध-स्वचालित पिस्टल है, जो अपनी मजबूती, 9mm क्षमता और उच्च मारक क्षमता के लिए जानी जाती है। यह 2001 से टीआईएसएएस (TİSAŞ) द्वारा निर्मित है, जिसमें 15-17 राउंड की क्षमता और डबल एक्शन ट्रिगर होता है। इसके सटीक निशाने और टिकाऊ निर्माण (एल्मुनियम मिश्र धातु) के कारण यह अपराध जगत में लोकप्रिय है।
बता दें रेस्टुरेंट में फायरिंग और हत्याकांड के बाद राँची पुलिस की तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि होटल टी टॉस में फायरिंग के वक्त यह प्रतिबंधित पिस्टल शूटरों को उपलब्ध कराई गई थी।प्रिंस खान गिरोह अब स्थानीय कट्टों के बजाय विदेशी और प्रतिबंधित हथियारों से अपनी पैठ जमाने की कोशिश कर रहा है।जांच आगे बढ़ा और ताबड़तोड़ कार्रवाई हुई।इस दौरान कई अपराधी सलाखों के अंदर गया।उसके बाद मुख्य शूटर सचिन पुलिस के हत्थे चढ़ा।पुलिस ने गोलीबारी में इस्तेमाल किया गया घातक हथियार (जिगाना पिस्टल) भी बरामद कर लिया है।वहीं रिमांड के दौरान प्रिंस खान गिरोह के सम्बंध में कई जानकारी पुलिस को दी है।जिस पर राँची पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि गिरोह के मुख्य पात्र राणा राहुल सिंह की गिरफ्तारी भी जल्द होने की संभावना है।
कौन है सचिन यादव,कैसे गिरोह के सम्पर्क आ गया..
टिटोस रेस्टोरेंट में हुई फायरिंग और एक कर्मचारी की मौत के मामले में पुलिस जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। धनबाद के रहने वाले 25 वर्षीय सचिन यादव ने पुलिस के सामने दिए अपने स्वीकारोक्ति बयान में पूरे साजिश का पर्दाफाश किया है। उसने बताया कि यह हमला किसी व्यक्तिगत रंजिश का नहीं, बल्कि संगठित अपराध के तहत रंगदारी वसूली के लिए किया गया था। इस पूरे ऑपरेशन को झारखण्ड का भगोड़ा गैंगस्टर सरगना प्रिंस खान उर्फ हैदर अली के निर्देश पर अंजाम दिया गया। सचिन यादव ने कबूल किया कि उसे पैसों का लालच देकर इस गिरोह में शामिल किया गया था। बचपन से आर्थिक तंगी और सीमित शिक्षा के कारण वह पहले छोटे-मोटे काम करता था, लेकिन बाद में अपराध की दुनिया में उतर गया। गैंग के सदस्यों ने उसे बताया कि रांची के एक होटल मालिक से एक करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी गई थी, लेकिन पैसा नहीं मिलने पर दहशत फैलाने के लिए फायरिंग करने का फैसला लिया गया। घटना के दिन सचिन अपने साथियों के साथ राँची पहुंचा और रेस्टोरेंट के अंदर घुसकर फायरिंग कर दी। इस दौरान एक कर्मचारी को गोली लग गई, जिसकी बाद में मौत हो गई। घटना के बाद सभी आरोपी भाग निकले और हथियार तथा कपड़े छुपा दिए। पुलिस ने दशम फॉल इलाके से सचिन को गिरफ्तार किया, जिसके बाद उसने पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया।
2017 से ही वह लूट और डकैती जैसे अपराधों में शामिल रहा
पुलिस के अनुसार, सचिन यादव का आपराधिक इतिहास पहले से रहा है। उसने अपने बयान में बताया कि वर्ष 2017 से ही वह लूट और डकैती जैसे अपराधों में शामिल रहा है और कई बार जेल भी जा चुका है। धीरे-धीरे वह संगठित अपराध गिरोह के संपर्क में आया और रंगदारी वसूली जैसे बड़े अपराधों में शामिल हो गया। सचिन ने बताया कि इस बार का टारगेट रांची का टिटोस रेस्टोरेंट था। गैंग के सदस्यों को पहले से ही होटल मालिक, उसके कर्मचारियों और लोकेशन की पूरी जानकारी दे दी गई थी। यह जानकारी स्थानीय स्तर पर जुड़े लोगों द्वारा उपलब्ध कराई गई थी। दुबई से इंटरनेट कॉल और व्हाट्सएप ऑडियो के जरिए लगातार निर्देश दिए जा रहे थे।
पहले 1 मार्च को रेस्टोरेंट में फायरिंग की योजना बनाई
पहले 1 मार्च को रेस्टोरेंट में फायरिंग की योजना बनाई गई थी, लेकिन उस दिन होटल बंद होने के कारण घटना को टाल दिया गया। इसके बाद 7 मार्च को दोबारा प्लान बनाकर चार लोगों की टीम राँची पहुंची। सचिन यादव को हथियार दिया गया और उसे रेस्टोरेंट के अंदर जाकर गोली चलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। घटना के दौरान सचिन ने काउंटर पर बैठे व्यक्ति पर गोली चलाई, लेकिन वह बच गया। इसके बाद एक अन्य कर्मचारी सामने आया, जिस पर उसने गोली चला दी। कर्मचारी मौके पर ही गिर पड़ा और बाद में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी तुरंत मोटरसाइकिल से फरार हो गए।
भागने के दौरान आरोपियों ने टोनको इलाके में एक पत्थर खदान के पास हथियार और कपड़े छुपा दिए। पुलिस से बचने के लिए उन्होंने अपने मोबाइल भी बंद कर दिए। हालांकि, बाद में पुलिस को सूचना मिली और जांच के दौरान सचिन यादव को पकड़ लिया गया। पूछताछ में यह भी सामने आया कि गैंग केवल एक ही घटना तक सीमित नहीं था। राँची के अन्य कारोबारियों और दवा दुकानों से भी रंगदारी मांगने की योजना बनाई जा रही थी। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है।
बचपन की गरीबी से अपराध की दुनिया तक
सचिन यादव ने बताया कि उसके पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी उसकी मां पर आ गई थी। आर्थिक तंगी के कारण वह पढ़ाई छोड़कर छोटे-मोटे काम करने लगा। कम आमदनी और गलत संगत के कारण वह अपराध की दुनिया में प्रवेश कर गया और धीरे-धीरे बड़े गिरोह का हिस्सा बन गया।
दुबई से चल रहा था पूरा नेटवर्क
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूरा ऑपरेशन दुबई से संचालित हो रहा था। गैंग सरगना प्रिंस खान इंटरनेट कॉल और व्हाट्सएप के जरिए निर्देश देता था। स्थानीय स्तर पर जुड़े लोग टारगेट की जानकारी उपलब्ध कराते थे, जिससे अपराध को अंजाम देना आसान हो जाता था।
दो बार बना प्लान, दूसरी बार हुई वारदात
पहली बार 1 मार्च को रेस्टोरेंट में फायरिंग की योजना बनाई गई थी, लेकिन होटल बंद होने के कारण घटना नहीं हो सकी। इसके बाद 7 मार्च को दोबारा प्लान बनाकर वारदात को अंजाम दिया गया। इस बार आरोपी पूरी तैयारी के साथ पहुंचे थे।
5 हजार एडवांस, बाकी रकम का इंतजार
घटना के बाद सचिन को केवल 5 हजार रुपए दिए गए थे। उसे बताया गया कि बाकी रकम बाद में मिलेगी। गिरोह के अन्य सदस्यों के खाते में कुछ पैसे ट्रांसफर भी किए गए थे, लेकिन पूरी रकम नहीं पहुंची थी। इससे साफ है कि अपराधियों को बड़े पैसों का लालच देकर इस्तेमाल किया जा रहा था।

