राँची कोर्ट का बड़ा फैसला: डायन-बिसाही के अंधविश्वास ने ली थी जान,महिला को मिली उम्रकैद
राँची।अंधविश्वास और डायन-बिसाही के आरोप में एक महिला की बेरहमी से हत्या करने के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी महिला को उम्रकैद की सजा सुनाई है। नामकुम थाना क्षेत्र के जामुनटोली गांव में हुए इस सनसनीखेज हत्याकांड में अपर न्याययुक्त अमित शेखर की अदालत ने बाशो देवी उर्फ बसंती देवी को आजीवन कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है।अदालत ने इससे पहले 16 जून को आरोपी को दोषी करार दिया था। गुरुवार को सजा पर अंतिम फैसला सुनाया गया।
सुबह चापानल पर हुआ हमला, मौके पर ही मौत
अभियोजन के अनुसार, यह वारदात 23 जुलाई 2022 की सुबह करीब 5 बजे हुई थी। मृतका सीमा देवी अपने घर के पास चापानल पर बर्तन धो रही थी, तभी आरोपी बाशो देवी वहां पहुंची और उस पर सबल (लोहे की रॉड) से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण सीमा देवी की मौके पर ही मौत हो गई।
अंधविश्वास बना हत्या की वजह
मामले में सामने आया कि आरोपी महिला अपने बीमार बेटे की बीमारी के लिए सीमा देवी को जिम्मेदार मानती थी और उस पर लगातार डायन-बिसाही का आरोप लगाती थी। इसके साथ ही पारिवारिक विवाद और जमीन हड़पने की कथित मंशा को लेकर भी लंबे समय से तनाव चल रहा था।
पति बना घटना का चश्मदीद गवाह
मृतका के पति चामू लोहरा इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी रहे। उन्होंने ही नामकुम थाना में मामला दर्ज कराया था। शुरुआती जांच में नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी, लेकिन पुलिस जांच के बाद केवल बाशो देवी के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल की गई।
कोर्ट में 9 गवाह, मजबूत सबूतों से साबित हुआ जुर्म
ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल नौ गवाहों के बयान दर्ज कराए, जिनके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले को डायन-बिसाही जैसी कुप्रथा के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
समाज के लिए कड़ा संदेश
यह फैसला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आज भी ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास किस तरह हिंसा और हत्या का कारण बन रहा है। अदालत ने अपने फैसले से स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे अपराधों में किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।

