JSCA भगदड़ पर भाजपा का हमला, अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव पर FIR और पद से हटाने की मांग

राँची। जेएससीए स्टेडियम में हुई भगदड़ की घटना अब राजनीतिक तूल पकड़ने लगी है। भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले में जेएससीए प्रबंधन को कटघरे में खड़ा करते हुए अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने और उन्हें पद से हटाने की मांग की है।प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि यह घटना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि जेएससीए की कार्यशैली और वीआईपी संस्कृति का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम दर्शकों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर विशेष मेहमानों की व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई, जिसके कारण हालात बेकाबू हो गए।

भाजपा ने कई गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब मैच के दौरान भारी भीड़ जुटने की संभावना पहले से थी, तो अतिरिक्त पुलिस बल, एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन एजेंसियों की मदद समय रहते क्यों नहीं ली गई। स्टेडियम में पर्याप्त मेडिकल सुविधा, एम्बुलेंस और प्रशिक्षित क्राउड मैनेजमेंट टीम की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?अजय साह ने आरोप लगाया कि बिना किसी स्पष्ट एसओपी के भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी सीमित पुलिस बल और कुछ बाउंसरों पर छोड़ दी गई। स्थिति बिगड़ने के बाद भी लोगों को सुरक्षित निकालने के बजाय बल प्रयोग किया गया, जिससे अफरातफरी और बढ़ गई।

भाजपा ने यह भी सवाल उठाया कि घटना के 72 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। पार्टी का आरोप है कि इस मामले में कार्रवाई को जानबूझकर टाला जा रहा है और जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है।

पार्टी ने मांग की है कि जेएससीए अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव समेत आयोजन से जुड़े सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए, उन्हें पद से हटाया जाए और निष्पक्ष जांच पूरी होने तक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।इसके अलावा भाजपा ने भगदड़ में घायल लोगों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने तथा उनके इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार और जेएससीए द्वारा उठाने की मांग की है।

भाजपा ने बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम हादसे का हवाला देते हुए राँची भगदड़ मामले की भी सीटिंग जज की निगरानी में न्यायिक जांच कराने की मांग की है, ताकि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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