गुपचुप वाली की मौत का खौफनाक सच: प्रेम, प्रतिशोध और मौत की वो साजिश, जिसके लिए दो महीने पहले लूटी गई थी अर्टिगा कार…महिला सहित चार गिरफ्तार..
राँची।राँची की सड़कों पर गुपचुप बेचने वाली रेखा को नहीं पता था कि जिस शख्स को वह अपना हमसफ़र समझ बैठी है, वही उसे मौत के मुहाने तक ले जा रहा है।यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि महीनों तक बुनी गई ऐसी साजिश थी, जिसमें प्रेम जाल, कथित सौतन की जलन, कार लूट, फर्जी नंबर प्लेट, गैंगरेप और फिर निर्मम हत्या जैसे कई खौफनाक अध्याय शामिल थे।21 जून को तुपुदाना के सिरी सोहराई पहाड़ की झाड़ियों में मिली महिला की लाश ने पुलिस को भी उलझन में डाल दिया था। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे सामने आती कहानी किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म से भी ज्यादा भयावह साबित हुई।
एक प्रेम प्रसंग जिसने ले ली जान
अरगोड़ा में ठेले पर गुपचुप बेचकर परिवार चलाने वाली रेखा देवी अपनी दुनिया में व्यस्त थी। इसी दौरान उसकी पड़ोसन संध्या उरांव का रेखा के पति संतोष भुइंया के साथ कथित प्रेम संबंध शुरू हो गया।दोनों शादी करने के लिए मन बना लिया थे।जब रेखा देवी को इस रिश्ते की भनक लगी, तो उसने कई बार संध्या का विरोध किया। वह अपने परिवार को टूटने से बचाना चाहती थी। लेकिन यही विरोध उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया।पुलिस जांच के मुताबिक संध्या ने रेखा को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया।
‘कथित सौतन’ का बदला: भाई को दी सुपारी जैसी जिम्मेदारी
रेखा को हटाने की जिम्मेदारी संध्या ने अपने अपराधी किस्म के भाई रमेश उरांव को सौंपी। रमेश ने अपने आपराधिक प्रवृत्ति वाले साथियों कृष्णादास गोस्वामी और लखन उरांव को इस योजना में शामिल किया।तीनों ने सीधे हत्या करने के बजाय ऐसा जाल बिछाया, जिसमें रेखा खुद चलकर फंस जाए।यहीं से शुरू हुआ ख़ौफ़नाक मौत की पटकथा का पहला अध्याय।
पहले प्यार का नाटक, फिर भरोसे का जाल
योजना के तहत संध्या के भाई रमेश ने लखन उरांव को रेखा के करीब भेजा गया।रमेश का दोस्त बताकर लखन की पहचान कराई गई। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ी, मुलाकातें शुरू हुईं और फिर रेखा को विश्वास हो गया कि लखन उससे सच्चा प्रेम करता है।जांच में सामने आया कि लखन ने शादी तक का सपना दिखाया। रेखा को लगा कि उसे नया जीवनसाथी मिल गया है।लेकिन उसे क्या पता था कि यह प्रेम नहीं, बल्कि उसकी मौत की तैयारी थी।
हत्या की तैयारी के लिए लूटी गई थी कार
इस साजिश की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हत्या के लिए अपराधियों ने दो महीने पहले ही एक कार की व्यवस्था कर ली थी। 20 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कुनकुरी निवासी कार चालक रवि राम को फर्जी कहानी सुनाकर उसकी अर्टिगा कार बुक की गई।वाहन मालिक को रामरेखा धाम से पत्नी को लाने का बहाना बनाकर उसे गुमला के बेलागड़ा गांव तक ले जाया गया।रात गहराते ही हथियारबंद अपराधियों ने चालक को बंधक बनाया, मोबाइल और चाबी छीन ली और कार लेकर फरार हो गए।उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यह कार आगे चलकर एक महिला की हत्या का सबसे बड़ा हथियार बनने वाली है।इस कार लूटकांड का मामला घाघरा थाना में दर्ज किया गया है।
फर्जी नंबर प्लेट लगाकर राँची में घूमते रहे आरोपी
कार लूटने के बाद अपराधियों ने उसकी असली पहचान मिटाने की तैयारी शुरू कर दी।जांच के अनुसार अर्टिगा पर बोकारो के एक वाहन का नंबर लगाकर फर्जी नंबर प्लेट तैयार की गई। अब कार पूरी तरह नई पहचान के साथ राँची की सड़कों पर दौड़ रही थी।उसी कार में बैठाकर लखन कई दिनों तक रेखा को इधर-उधर घुमाता रहा। महंगी गाड़ी देखकर रेखा को विश्वास हो गया कि लखन संपन्न और प्रभावशाली व्यक्ति है।यहीं अपराधियों की चाल काम कर गई।
19 जून: मौत की तरफ आखिरी सफर
19 जून को लखन ने रेखा को दशम फॉल घुमाने का प्रस्ताव दिया।रेखा खुशी-खुशी तैयार हो गई।उसे नहीं पता था कि जिस कार में वह बैठ रही है, वह पहले ही एक आपराधिक साजिश का हिस्सा बन चुकी है।पुलिस के अनुसार दशम फॉल घुमाने के बाद शाम होने पर उसी दिन उसे लेकर आरोपी जंगल क्षेत्र की ओर निकल गए।
जंगल में दरिंदगी की सारी हदें पार
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पहले रेखा के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।बताया जा रहा है कि 19 जून की रात से लेकर अगले दिन तक उसके साथ लगातार अत्याचार किया गया।रेखा को शायद आखिरी समय तक उम्मीद रही होगी कि लखन उसे बचाएगा, लेकिन जिस व्यक्ति पर उसने सबसे ज्यादा भरोसा किया था, वही उसकी मौत का हिस्सा बन चुका था।
राज खुलने का डर और फिर हत्या
जब आरोपियों को लगा कि रेखा जिंदा रही तो पूरी साजिश उजागर हो सकती है, तब उन्होंने उसे खत्म करने का फैसला कर लिया।20 जून की रात उसकी हत्या कर दी गई।
इसके बाद शव को पहचान छिपाने की नीयत से तुपुदाना क्षेत्र के दसमाईल स्थित सिरी सोहराई पहाड़ के पास सड़क पर फेंक दिया गया।आरोपियों को लगा कि मामला हमेशा के लिए दफन हो जाएगा।लेकिन यही उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई।
21 जून:सड़क किनारे मिली लाश और मच गया हड़कंप
अगले दिन स्थानीय लोगों ने सड़क किनारे में महिला का शव देखा।सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची।शुरुआत में शव की पहचान तक नहीं हो पा रही थी। कुछ देर बाद महिला की पहचान हो गई।मृतका के भाई ने तुपुदाना थाना में मामला दर्ज कराया।पुलिस को मामला पूरी तरह ब्लाइंड मर्डर जैसा दिख रहा था।लेकिन राँची पुलिस ने इसे चुनौती के रूप में लिया।
सीसीटीवी, मोबाइल लोकेशन और फर्जी नंबर प्लेट ने खोला राज
एसएसपी के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले।मोबाइल लोकेशन,कॉल डंप और तकनीकी साक्ष्यों की बारीकी से जांच शुरू हुई।जांच के दौरान सबसे बड़ा सुराग अर्टिगा कार का नंबर बना।जब पुलिस बोकारो पहुंची तो पता चला कि जिस नंबर की कार दिखाई दे रही है, वह वास्तव में दूसरी गाड़ी है।यहीं से अधिकारियों को शक हुआ कि अपराधियों ने फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया है।इसके बाद छत्तीसगढ़ में अप्रैल महीने में हुई कार लूट की घटना का लिंक सामने आया और पूरी कहानी खुलती चली गई।
22 जगह छापेमारी, फिर दबोचे गए चारों आरोपी
राँची, लोहरदगा, बोकारो और आसपास के इलाकों में लगातार छापेमारी की गई।करीब 22 स्थानों पर दबिश देने के बाद पुलिस ने एक-एक कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तार आरोपियों में संध्या कुमारी (मुख्य साजिशकर्ता),रमेश उरांव,कृष्णादास गोस्वामी लखन उरांव शामिल है।
बरामद हुई लूटी गई कार और हथियार
गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई फर्जी नंबर प्लेट लगी अर्टिगा कार बरामद कर ली।इसके अलावा एक देसी पिस्तौल, दो कट्टे, नौ जिंदा कारतूस और कई मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं।
पुलिस के सामने भी खुलती गई साजिश की परतें
हटिया डीएसपी नीरज कुमार के अनुसार यह कोई आवेश में की गई हत्या नहीं थी।पूरी योजना महीनों पहले बनाई गई थी।पहले प्रेम जाल बिछाया गया, फिर कार लूटी गई, उसके बाद फर्जी नंबर प्लेट तैयार हुई और अंत में सुनियोजित तरीके से महिला को जंगल ले जाकर वारदात को अंजाम दिया गया।यही वजह है कि यह मामला सामान्य हत्या से कहीं अधिक एक सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र के रूप में सामने आया है।
एक और सनसनीखेज हत्याकांड का राँची पुलिस ने खुलासा करते हुए अपराधियों को सलाख़ों के अंदर भेजा।इस सनसनीखेज हत्याकांड को खुलासा करने में राँची के एसएसपी राकेश रंजन के निगरानी में सिटी एसपी पारस राणा,हटिया डीएसपी नीरज कुमार और अरगोड़ा,धुर्वा,तुपुदाना पुलिस की मुख्य भूमिका रही है।

