CID की पूछताछ के 24 घंटे के भीतर रिम्स निदेशक का इस्तीफा मंजूर, डॉ. राजकुमार ने छोड़ी कुर्सी; डॉ. दीपेंद्र सिन्हा को मिली कमान

 

राँची। झारखण्ड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में गुरुवार को बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम देखने को मिला। रिम्स के निदेशक प्रो. डॉ. राजकुमार का इस्तीफा राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए सर्जरी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा को रिम्स का नया कार्यकारी निदेशक नियुक्त कर दिया है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर हुए नामांकन मामले की जांच में सीआईडी लगातार सक्रिय है और एक दिन पहले ही रिम्स में लंबी पूछताछ और दस्तावेजों की जांच की गई थी। ऐसे में निदेशक के अचानक इस्तीफे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस्तीफे के साथ खत्म हुआ कार्यकाल, सरकार ने तुरंत की नई नियुक्ति

स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, विभागीय मंत्री-सह-शासी परिषद के अध्यक्ष डॉ. इरफान अंसारी की मंजूरी के बाद डॉ. राजकुमार का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया। अस्पताल के प्रशासनिक कार्यों में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा को अगले आदेश तक निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है।

इस्तीफे में झलका दर्द, लिखा- काम करने का माहौल नहीं मिला

सूत्रों के मुताबिक, डॉ. राजकुमार ने गुरुवार सुबह स्वास्थ्य मंत्री को अपना इस्तीफा भेजा था। इस्तीफे में उन्होंने निजी कारणों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला दिया है। हालांकि पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि रिम्स के विकास और सुधार के लिए कई प्रयासों के बावजूद उन्हें संस्थान में अपेक्षित कार्य वातावरण नहीं मिल पाया।

CID की कार्रवाई के बाद बढ़ी हलचल

रिम्स में फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नामांकन मामले की जांच कर रही सीआईडी टीम ने बुधवार को संस्थान में व्यापक जांच अभियान चलाया था। जांच के दौरान एडमिशन सेक्शन, महत्वपूर्ण फाइलों, टेंडर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। सूत्रों के अनुसार, निदेशक डॉ. राजकुमार, डीन और चिकित्सा अधीक्षक से करीब सात से आठ घंटे तक गहन पूछताछ की गई थी।

जांच एजेंसी ने कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं और निर्णयों को लेकर जवाब मांगा था। बताया जाता है कि इस लंबी पूछताछ के बाद से ही रिम्स प्रशासन में हलचल बढ़ गई थी और निदेशक खुद भी असहज महसूस कर रहे थे।

इस्तीफा या दबाव? चर्चा तेज

हालांकि सरकार ने इस्तीफे को स्वास्थ्य और निजी कारणों से जोड़ा है, लेकिन सीआईडी जांच के ठीक बाद आए इस फैसले ने कई अटकलों को जन्म दे दिया है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या यह महज संयोग है या फिर इसके पीछे जांच की बढ़ती आंच का भी असर है।

फिलहाल रिम्स की कमान डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा के हाथों में सौंप दी गई है, लेकिन फर्जी प्रमाणपत्र प्रकरण और सीआईडी की जांच के बीच हुआ यह इस्तीफा आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की ओर संकेत कर रहा है।

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