वन विभाग की दबिश की भनक लगते ही भालू छोड़कर फरार हुआ मदारी,घंटों की मशक्कत के बाद हुआ रेस्क्यू
दुमका। एक समय था जब गांव-गांव और गली-मोहल्लों में मदारी भालू का खेल दिखाकर लोगों का मनोरंजन किया करते थे, लेकिन वन्यजीव संरक्षण कानूनों के सख्त होने के बाद इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके बावजूद कुछ लोग आज भी चोरी-छिपे जंगली जानवरों का इस्तेमाल कर खेल दिखाने का काम कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला झारखण्ड के दुमका जिले से सामने आया है, जहां वन विभाग ने एक जंगली भालू को रेस्क्यू कर सुरक्षित अपने कब्जे में लिया है।
जानकारी के अनुसार, दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड अंतर्गत मंझलाडीह गांव में शुक्रवार शाम ग्रामीणों ने एक मदारी को विशालकाय भालू के साथ घूमते देखा। बताया जाता है कि नुरुल नामक मदारी अपने दो साथियों के साथ गांव में पहुंचा था और जगह-जगह रुककर भालू का खेल दिखा रहा था। भालू को करतब करवाकर लोगों की भीड़ जुटाई जा रही थी। इसी दौरान किसी ग्रामीण ने इसकी सूचना वन विभाग को दे दी।
सूचना मिलते ही शिकारीपाड़ा वन विभाग की टीम तत्काल कार्रवाई के लिए गांव की ओर रवाना हुई। हालांकि, वन विभाग की टीम के पहुंचने की भनक मदारी और उसके साथियों को लग गई। कार्रवाई के डर से उन्होंने भालू को गांव के एक पेड़ से बांध दिया और मौके से फरार हो गए।जब वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो वहां भालू पेड़ से बंधा मिला। भालू की स्थिति को देखते हुए वनकर्मियों ने इसकी जानकारी वरीय अधिकारियों को दी।इसके बाद शनिवार को दुमका से एक बड़ा पिंजरा मंगवाया गया ताकि भालू को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जा सके।
रेस्क्यू अभियान के दौरान भालू को पिंजरे में बंद करना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती साबित हुआ। पिंजरा देखते ही भालू काफी उग्र और आक्रामक हो गया। वनकर्मियों को उसे काबू में करने और सुरक्षित तरीके से पिंजरे में डालने के लिए करीब चार से पांच घंटे तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। आखिरकार लंबी कोशिशों के बाद भालू को पिंजरे में बंद कर दुमका वन विभाग के डिपो लाया गया, जहां फिलहाल उसकी देखरेख की जा रही है।वन विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए फरार मदारी की पहचान कर ली है। उसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में शिकारीपाड़ा के वन पदाधिकारी तारणी मंडल ने बताया कि भालू को सुरक्षित रेस्क्यू करने के लिए वन विभाग की टीम को काफी मेहनत करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी वन्यजीव विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी गई है। अधिकारियों के निर्देश मिलने के बाद भालू को किसी उपयुक्त चिड़ियाघर, रेस्क्यू सेंटर या सुरक्षित वन्यजीव संरक्षण केंद्र में भेजा जाएगा, जहां उसकी बेहतर देखभाल की जा सके।वन विभाग की इस कार्रवाई की ग्रामीणों ने सराहना की है। लोगों का कहना है कि जंगली जानवरों का इस तरह इस्तेमाल करना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि वन्यजीवों के प्रति क्रूरता भी है। ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति वन्यजीवों का अवैध रूप से इस्तेमाल करने की हिम्मत न कर सके।

