एक चालान और खुल गया बड़ा राज:फाइनेंस कंपनी से बचने के लिए कार पर लगाया बाइक का नंबर,चालक गिरफ्तार
राँची। राजधानी के चुटिया थाना क्षेत्र में फर्जी नंबर प्लेट लगाकर गाड़ियां दौड़ाने वाले एक गंभीर मामले का भंडाफोड़ हुआ है। यातायात व्यवस्था को ठेंगा दिखाकर अवैध तरीके से वाहन चलाने और किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की साजिश का पुलिस ने समय रहते पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने इस मामले के आरोपी मोहम्मद अमजद को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
कैसे खुली पोल?
मामला 3 जून 2026 की शाम करीब 4:30 बजे का है। पटेल चौक पर तैनात यातायात पुलिस के एएसआई (सअनि) दामोदर कुमार राय स्टेशन रोड स्थित गुरुनानक अस्पताल के सामने चेकिंग और यातायात संचालन कर रहे थे। इसी दौरान अवैध पार्किंग (नो-पार्किंग) में खड़ी एक स्विफ्ट कार (नंबर- JH01EB-5180) पर उनकी नजर पड़ी।जब पुलिस अधिकारी ने चालान काटने के लिए अपने डिजिटल डिवाइस से गाड़ी के नंबर को सर्च किया, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। जिस नंबर प्लेट को स्विफ्ट कार पर लगाया गया था, वह असल में सुरेश सिंह के नाम पर पंजीकृत एक ‘हीरो ग्लैमर’ मोटरसाइकिल का निकला। यानी कार पर बाइक का फर्जी नंबर लगाकर उसे बेधड़क सड़कों पर दौड़ाया जा रहा था।
धोखाधड़ी का पता चलते ही ट्रैफिक पुलिस ने तत्परता दिखाई। जब कार के चालक के बारे में पूछताछ की गई, तो मौके पर मौजूद मोहम्मद अमजद (उम्र करीब 40 वर्ष, पिता- शाकिर हुसैन, निवासी- अलकमार कॉलोनी, कमड़े, रातू, राँची) ने दावा किया कि यह गाड़ी उसकी है। ट्रैफिक पुलिस की लिखित शिकायत पर चुटिया थाना में तुरंत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
‘फाइनेंस और जब्ती के डर से रचा था खेल’
इस संबंध में चुटिया थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर पूनम कुजूर ने बताया कि स्विफ्ट कार में फर्जी तरीके से बाइक का नंबर लगाकर चलाया जा रहा था। पूछताछ के दौरान आरोपी कार चालक अमजद ने जो खुलासा किया, वह चौंकाने वाला है।चालक ने पुलिस को बताया कि कार की फाइनेंस कंपनी की कई किश्तें (EMI) बाकी थीं।डर था कि फाइनेंस कंपनी वाले गाड़ी को जब्त कर लेंगे। इसी जब्ती के डर से बचने के लिए अमजद ने अपनी कार पर मोटरसाइकिल का फर्जी नंबर लगा दिया था।थाना प्रभारी पूनम कुजूर के अनुसार, आरोपी अमजद पुलिस के सामने कार का कोई भी वैध कागजात (R.C. या इंश्योरेंस) प्रस्तुत नहीं कर सका। कार चालक का कहना है कि यह कार किसी दूसरे के नाम पर ली गई थी।कागजात न होने के कारण अब पुलिस को इस बात का गहरा शक है कि कहीं यह कार चोरी की तो नहीं है? पुलिस अब इस बिंदु पर भी कड़ाई से जांच कर रही है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे कोई और बड़ा आपराधिक सिंडिकेट तो काम नहीं कर रहा था। फिलहाल, आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

