एक डिसमिल जमीन के विवाद ने ली जान: विधायक के चालक की हत्या के बाद गांव में भड़का आक्रोश, आरोपियों के घर में लगाई आग…

 

कोडरमा।महज एक डिसमिल जमीन को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद आखिरकार खूनी संघर्ष में बदल गया। झारखण्ड के कोडरमा थाना क्षेत्र के चितरपुर गांव में विधायक डॉ.नीरा यादव के निजी वाहन चालक राजकुमार यादव की निर्मम हत्या के बाद पूरे गांव का माहौल तनावपूर्ण और गमगीन हो गया। घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और आरोपियों के घर में आग लगा दी गई।वहीं मामले में एक दर्जन से ज्यादा लोगों पर नामजद मामला दर्ज किया गया है।पुलिस ने हत्याकांड में करीब आधा दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।आगे की कार्रवाई जारी है।

‘सनक’ ने उजाड़ दिया पूरा परिवार

परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि आरोपी पक्ष की जिद और सनक ने एक परिवार को बर्बाद कर दिया। राजकुमार यादव परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे। उनके परिवार में वृद्ध माता-पिता, पत्नी और बच्चे हैं। हमले में उनके माता-पिता और एक बेटी भी घायल हो गए।बताया गया कि घटना के समय राजकुमार घर में स्नान कर रहे थे। इसी दौरान पड़ोसी पक्ष के लोग घर के बाहर गाली-गलौज करने लगे। विरोध करने बाहर निकले राजकुमार पर आरोपियों ने हमला कर दिया। परिजनों का आरोप है कि उन्हें बेरहमी से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया गया।

मुख्य सड़क पर घर, फिर भी साइड में दरवाजा खोलने की जिद

ग्रामीणों के अनुसार विवाद की जड़ वह एक डिसमिल जमीन है, जिस पर आरोपी पक्ष दरवाजा निकालना चाहता था। हैरानी की बात यह है कि आरोपी परिवार का घर गांव के मुख्य मार्ग पर स्थित है और उनके पास पर्याप्त फ्रंटेज भी है। इसके बावजूद वे साइड की विवादित जमीन की ओर मुख्य दरवाजा खोलने पर अड़े थे।
पीड़ित परिवार का घर आरोपियों के घर के पीछे है और उन्हें आने-जाने के लिए उसी खाली जमीन का उपयोग करना पड़ता है। वहीं पास में एक सामुदायिक कुआं भी है, जिसका पानी पूरे गांव के लोग इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विवादित जमीन गैरमजरूआ है और आरोपी पक्ष का मकान भी सरकारी जमीन पर बना हुआ है।

2006-07 से चला आ रहा था विवाद

परिजनों के मुताबिक दोनों परिवारों के बीच जमीन को लेकर विवाद वर्ष 2006-07 से चल रहा था। कई बार पंचायतें हुईं, समझौते के प्रयास भी किए गए और दस्तावेज तैयार हुए, लेकिन विवाद खत्म नहीं हुआ।
घटना वाले दिन भी दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई थी। ग्रामीणों ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया और रविवार को पंचायत बुलाने की बात तय हुई थी। लेकिन देर शाम आरोपी पक्ष फिर उग्र हो गया और रात में राजकुमार की हत्या कर दी गई।

शव पहुंचते ही फूटा गुस्सा, आरोपियों के घर में आग

गुरुवार को जैसे ही राजकुमार यादव का शव गांव पहुंचा, माहौल पूरी तरह बदल गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपियों के घर में आग लगा दी, जिससे दो बाइक समेत कई सामान जलकर राख हो गए। घटना के वक्त आरोपी परिवार घर छोड़कर फरार हो चुका था।

फायर बिग्रेड और पुलिस का भी हुआ विरोध

आगजनी की सूचना पर फायर बिग्रेड और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। लेकिन गुस्साए ग्रामीणों ने आग बुझाने का विरोध किया। कुछ महिलाओं ने फायर बिग्रेड वाहन पर हल्का पथराव भी किया, जिसके बाद आग बुझाने की कार्रवाई रोकनी पड़ी।

डीएसपी अरविंद कुमार, तिलैया थाना प्रभारी विनय कुमार और चंदवारा थाना प्रभारी शशिभूषण कुमार ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराया और हालात पर काबू पाया।
आरोपियों की गिरफ्तारी तक नहीं मान रहे थे परिजन
आक्रोशित परिजन शव को आरोपियों के घर के बाहर रखकर वहीं अंतिम संस्कार करने की मांग पर अड़ गए थे। इसके लिए ट्रैक्टर से लकड़ियां भी मंगाई गई थीं। काफी समझाइश और 24 घंटे के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी के पुलिस आश्वासन के बाद परिजन माने और शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जाया गया।

बड़ा सवाल ?
एक डिसमिल जमीन, वर्षों पुराना विवाद और दरवाजा खोलने की जिद… क्या यही वजह बनी एक निर्दोष की मौत की? चितरपुर गांव में आज हर जुबान पर यही सवाल है, जबकि एक परिवार अपने इकलौते सहारे को खोने के दर्द से गुजर रहा है।

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