बारिश में गल गया सोना,बंदर ले गए जेवर ! पुलिस की दलील पर भड़का कोर्ट, बोला- यह लापरवाही नहीं, डकैती जैसी हरकत…
–एक करोड़ से अधिक के जेवर गायब, अदालत ने पुलिसकर्मियों पर जताया कदाचार का शक; पीड़ित आज भी न्याय का इंतजार कर रहा…
डेस्क टीम/लखीमपुर। सदर कोतवाली के मालखाने से एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के सोने के जेवर गायब होने के मामले में अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर बेहद कड़ी टिप्पणी की है। पुलिस ने अदालत को बताया कि मालखाने की पोटलियों को सुखाने के लिए छत पर रखा गया था, जहां बारिश में जेवरात नष्ट हो गए और बंदर उन्हें उठा ले गए। लेकिन अदालत ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि सोना बारिश में नष्ट नहीं हो सकता और मालखाने में सुरक्षित रखे गए बहुमूल्य जेवरों के गायब होने की यह कहानी विश्वास के योग्य नहीं है।अदालत ने इसे महज लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर कदाचार और संभावित आपराधिक कृत्य माना।
17 साल पुराने केस में सामने आया चौंकाने वाला खुलासा
मामला वर्ष 2007 का है। शहर के कपूरथला मोहल्ले की निवासी रानी अग्रवाल उर्फ जूली ने दीपावली की रात आत्महत्या कर ली थी। पोस्टमार्टम के दौरान उनके शरीर से उतारे गए सोने के आभूषण पुलिस को सौंपे गए थे और बाद में उन्हें सदर कोतवाली के मालखाने में जमा कराया गया।
दहेज हत्या के आरोप में दर्ज मुकदमे में लंबी सुनवाई के बाद फरवरी 2024 में सभी आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। इसके बाद मृतका के पति मुदित अग्रवाल ने अदालत से जेवर वापस दिलाने की मांग की। तभी पुलिस की रिपोर्ट ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।
कोर्ट ने पूछा- आखिर सोना बारिश में कैसे गल गया?
पुलिस ने अदालत को बताया कि वर्ष 2013 में मालखाने की पोटलियों को सुखाने के लिए छत पर रखा गया था। बारिश के कारण पोटलियां खराब हो गईं और बंदर जेवरात को इधर-उधर ले गए। इस दलील पर अदालत ने तीखी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह स्पष्टीकरण तर्कसंगत नहीं है।अदालत ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि मालखाने में जमा बहुमूल्य आभूषणों का दुरुपयोग किया गया और बाद में अभिलेखों में फर्जी प्रविष्टियां कर मामले को दबाने की कोशिश की गई।
दोषियों पर कार्रवाई और मुआवजे का आदेश
तत्कालीन सत्र न्यायाधीश लक्ष्मीकांत शुक्ल ने मामले की जांच कर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने तथा पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए थे। हालांकि आदेश के बावजूद पीड़ित को अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला है।
एक साल से न्याय के लिए भटक रहा पीड़ित
पीड़ित मुदित अग्रवाल का कहना है कि वह पिछले एक वर्ष से एसपी कार्यालय से लेकर डीएम कार्यालय तक न्याय की गुहार लगा रहे हैं। सूचना के अधिकार के तहत भी कई आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक कोई राहत नहीं मिली। थक-हारकर अब उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी शुरू कर दी है।
कोर्ट की टिप्पणी से मची खलबली
अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद सदर कोतवाली से लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक हड़कंप मचा हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर करोड़ों रुपये के जेवर कहां गए और दोषियों पर कब कार्रवाई होगी

