धुर्वा थाने में गुहार: तीमारदार ही बन बैठा मकान मालिक, खाली कराने गए आवंटी को मारपीट कर निकाला बाहर, जान से मारने की धमकी

–एचईसी स्टेट ऑफिसर और पुलिस से न्याय की आस, पीड़ित ने कहा- “पैसे के बल पर जन वितरण प्रणाली का डीलर बनकर अवैध रूप से काबिज है आरोपी”

राँची।राजधानी राँची के धुर्वा थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। भारी इंजीनियरिंग निगम (एचईसी) के एक दिवंगत कर्मचारी का दिव्यांग बेटा अपनी बुजुर्ग मां के साथ पिछले कई दिनों से राँची की सड़कों के किनारे रहने को विवश है। पीड़ित का आरोप है कि उसके आवंटित सरकारी क्वार्टर पर एक रसूखदार व्यक्ति ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है और विरोध करने पर उन्हें मारपीट कर जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया गया है। मामले को लेकर पीड़ित ने 16 जून को धुर्वा थाना प्रभारी को लिखित शिकायत सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।

इलाज के लिए गांव क्या गए, तीमारदार ही बन बैठा कब्जाधारी

शिकायतकर्ता संजीत कुमार सिंह के अनुसार, उनके पिता स्वर्गीय राम सेवक सिंह एचईसी के कर्मचारी थे, जिनकी मृत्यु ड्यूटी के दौरान ही हो गई थी। इसके बाद अनुकंपा/डेथ केस के आधार पर वर्ष 2003 में संजीत कुमार को धुर्वा स्थित आवास संख्या- A-45/IV आवंटित किया गया था। संजीत दोनों पैरों से लकवाग्रस्त (पैरालाइज्ड) हैं और गंभीर रूप से बीमार रहते हैं। लगातार खराब तबीयत और घोर आर्थिक तंगी के कारण वे अपने इलाज के लिए पैतृक गांव (पो०- गसरिया, थाना- चौपारण, जिला- हजारीबाग) और राँची के रिम्स अस्पताल में रहने लगे। इस दौरान उन्होंने अपने आवास की देखरेख के लिए रमाशीश यादव (उर्फ रमाशीश सिंह) नाम के व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपी थी।

लौट कर आए तो धक्का मारकर निकाला, दी जा रही है आवंटन रद्द कराने की धमकी

पीड़ित संजीत कुमार सिंह का आरोप है कि जब वे अपनी बीमारी का इलाज कराकर वापस अपने घर लौटे, तो रमाशीश यादव ने घर खाली करने से साफ मना कर दिया। इतना ही नहीं, आरोपी ने संजीत को घर से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया और विरोध करने पर मारपीट करते हुए लगातार जान से मारने की धमकी दे रहा है। पीड़ित का आरोप है कि आरोपी रमाशीश अवैध रूप से पैसों के बल पर जन वितरण प्रणाली का डीलर बन बैठा है और अब वह ‘डेथ केस’ का हवाला देकर संजीत के क्वार्टर का आवंटन ही रद्द कराने की धमकी दे रहा है।

पुलिस और प्रशासन के चक्कर काट कर थक चुका है लाचार परिवार

लाचार और दिव्यांग संजीत कुमार सिंह ने बताया कि वह अपने हक के लिए लगातार राँची जिला पुलिस, हटिया डीएसपी और धुर्वा थाना प्रभारी के पास चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने 16 जून को एचईसी के स्टेट ऑफिसर (टाउनशिप) से भी मुलाकात कर लिखित आवेदन दिया है, जहां से धुर्वा थाना को अवैध कब्जा हटाकर मकान सौंपने की बात कही गई है। इससे पहले भी पीड़ित ने 27 जून 2022 और 3 अप्रैल 2026 को धुर्वा थाने में आवेदन देकर गुहार लगाई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

सड़क किनारे रात गुजारने को मजबूर

दोनों पैरों से लाचार पीड़ित संजीत कुमार और उनकी बूढ़ी मां पिछले दो दिनों से राँची की सड़कों के किनारे रहने को मजबूर हैं। एक तरफ जहां सरकार और प्रशासन दिव्यांगों और बुजुर्गों के संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं राजधानी के वीआईपी इलाके धुर्वा में एक दिव्यांग अपनी ही छत के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है। पीड़ित ने थाना प्रभारी से भावुक अपील करते हुए कहा है कि इस भीषण संकट में मुझ गरीब और लाचार पर कृपा कर मेरा आवास वापस दिलाया जाए।

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