एक क्लिक में खाली हो रही जेब: ऑनलाइन ऐप्स की लत ने बढ़ाई चिंता–
–डिजिटल ब्लैकहोल: वेलियो जैसे सैकड़ों ऐप्स के झांसे में आकर हर दिन 3,000 से 10,000 रुपये तक फूंक रहे हैं लोग; 14 से 70 साल के उम्र के लोग हो रहे हैं इस लाइलाज मानसिक एडिक्शन के शिकार
–इंटरनेट पर युवाओं को परोसा जा रहा ‘ऑनलाइन सेक्स’: हर मिनट 20 से 60 रुपये की वसूली, लीगल प्लेटफॉर्म की आड़ में चल रहा ‘हनीट्रैप’ का गंदा खेल
राँची।तकनीक के इस दौर में जहां डिजिटल इंडिया तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं साइबर स्पेस के स्याह पन्नों से एक ऐसा सच सामने आया है जिसने समाज के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। ‘हनीट्रैप’ (हुस्न के जाल में फंसाकर ठगी करना) जिसे अब तक एक पारंपरिक अपराध माना जाता था, उसे अब कुछ चालाक टेक कंपनियों ने ‘लीगल प्लेटफॉर्म’ की आड़ में एक संगठित बिजनेस मॉडल बना दिया है।इंटरनेट पर आज ऐसे सैकड़ों वीडियो चैट और डेटिंग ऐप्स की बाढ़ आ गई है, जो ‘ऑनलाइन सेक्स’ और अश्लील विमर्श परोस कर हर महीने करोड़ों रुपये कमा रहे हैं।
क्या है खेल? एक मिनट की कीमत 15 से 60 रुपये
इन ऐप्स का काम करने का तरीका बेहद शातिर है। यह पूरा खेल गूगल पे, फोनपे या ऑनलाइन रिचार्ज के जरिए टोकन या कॉइन खरीदने से शुरू होता है।ये ऐप्स दावा तो ‘फ्रेंडशिप’ या ‘लाइव चैट’ का करते हैं, लेकिन इन पर आने वाले 90 प्रतिशत उपभोक्ता केवल गंदी और सेक्सुअल बातें (अश्लील संवाद) करने या न्यूड वीडियो कॉल देखने के उद्देश्य से आते हैं। इस आभासी दुनिया में समय बिताने के लिए उपभोक्ताओं को प्रति मिनट 15 से 60 रुपये तक का भारी-भरकम भुगतान करना पड़ता है।चौंकाने वाली बात यह है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर केवल ‘वन-वे कॉलिंग’ की अनुमति होती है; यानी उपभोक्ता अपनी तरफ से लड़की को सीधे कॉल नहीं कर सकता, बल्कि उसे ऐप के जरिए ही कनेक्ट होना पड़ता है. यह व्यवस्था इसलिए बनाई जाती है ताकि बातचीत पूरी तरह ऐप के नियंत्रण में रहे और इनका ‘बिजनेस’ लगातार चलता रहे।
14 से 70 साल के लोग शिकार, प्रतिदिन 10 हजार तक की चपत
इस डिजिटल जाल की पहुंच किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। आंकड़ों और केस स्टडीज के अनुसार, 14 साल के नाबालिग किशोरों से लेकर 70 साल के बुजुर्ग तक इस लत की चपेट में हैं। आकर्षण और अकेलेपन का शिकार इंसान अपनी इस मानसिक कमजोरी के चलते इन ऐप्स पर पानी की तरह पैसा बहा रहा है। कई लोग तो औसतन 3,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये प्रतिदिन तक इन अश्लील चैट्स और वीडियो कॉल्स पर खर्च कर रहे हैं, जो बाद में उनके बड़े वित्तीय संकट का कारण बन जाता है।
ग्राउंड रियलिटी: वेलियो ऐप का सच
इस भयावह सच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब इस तरह के ऐप्स (जैसे वेलियो) की पड़ताल की गई, तो पाया गया कि मात्र 6 मिनट की वीडियो या ऑडियो बातचीत के लिए ₹300 का रिचार्ज कराना पड़ा।यानी महज कुछ मिनटों के मनोरंजन के लिए युवाओं की जेब से सैकड़ों-हजारों रुपये झटके जा रहे हैं।

