मेला दिखाने का झांसा… जंगल में वहशीपन; राँची की युवती के कत्ल की रोंगटे खड़े कर देने वाली इनसाइड स्टोरी…

​शादी का दबाव… जंगल में वहशीपन… और साफी नदी की रेत में दफन वो राज, जिसे कातिल कभी खुलने नहीं देना चाहते थे। लेकिन, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की नजर और पुलिस के चक्रव्यूह ने अपराधियों के उस ‘परफेक्ट मर्डर’ के घमंड को नेस्तनाबूद कर दिया।

​राँची/चतरा।झारखण्ड के चतरा जिले के पिपरवार थाना क्षेत्र में साफी (सपही) नदी के किनारे बालू में दबी एक गुमनाम लाश ने जो राज उगला, उसने राँची से लेकर चतरा तक को हिला कर रख दिया है।​मनातु (खलारी) के रहने वाले सूरज कुमार (19 वर्ष) के साथ रातू की रहने वाली एक युवती ने तो सिर्फ अपनी मोहब्बत का हक मांगा था। वह शादी का दबाव बना रही थी, लेकिन सूरज के दिमाग में इश्क नहीं, बल्कि खौफनाक साजिश पक रही थी। उसके बाद ​1-2 जून की आधी रात में सूरज ने अपने तीन दोस्तों पवन महतो (21), राहुल भुंईया (19), और रोहित कुमार महतो (19) के साथ मिलकर एक खूनी स्क्रिप्ट तैयार की। युवती को मेला घुमाने के बहाने पंडरिया के घने और सूने जंगलों में ले जाया गया। जहां रक्षक बनने का दावा करने वाला प्रेमी भक्षक बन चुका था।​पंडरिया के सन्नाटे में जो हुआ, वह इंसानियत को शर्मसार करने वाला था। सूरज के सामने ही उसके दोस्तों ने युवती के साथ हैवानियत (दुष्कर्म) की हदें पार कर दीं। जब युवती की चीखें जंगल में गूंज रही थीं, तब कातिलों के हाथ नहीं कांपे। राज हमेशा के लिए दफन हो जाए, इसलिए चाकू और भारी ईंटों से हमला कर उसे बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। पहचान मिटाने और कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए लाश को साफी नदी के किनारे बालू में गहरा दफना दिया गया।

​6 जून 2026 को नदी के किनारे बालू के बीच से जब वो अज्ञात शव बरामद हुआ, तो पुलिस के सामने एक अंधी सुरंग थी। न लड़की की पहचान थी, न कातिलों का सुराग। लेकिन चतरा पुलिस ने इसे एक चुनौती की तरह लिया।टंडवा एसडीपीओ प्रभात रंजन बरवार के नेतृत्व में एक स्पेशल टीम मैदान में उतरी और घटनास्थल की तुरंत घेराबंदी की गई। FSL की टीम ने वैज्ञानिक तरीके से एक-एक साक्ष्य को इकट्ठा किया।

आधुनिक तकनीक, मोबाइल टावर डंप डेटा और लोकल इनपुट के जरिए सबसे पहले मृतका की पहचान राँची के रातू की रहने वाली युवती के रूप में हुई। इसके बाद कड़ियां जुड़ती गईं और शक की सुई सीधे प्रेमी सूरज पर जाकर टिक गई।

​वैज्ञानिक और तकनीकी जांच के आगे शातिर कातिलों की चालाकी धरी की धरी रह गई। पुलिस ने चारों आरोपियों सूरज, पवन, राहुल और रोहित को दबोच लिया। बुधवार को चारों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

पुलिस ने सिर्फ कातिलों को ही नहीं पकड़ा, बल्कि अदालत में उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए पुख्ता सबूत भी जब्त कर लिए हैं। वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू, खून से सनी ईंट, आरोपियों की बाइक और मृतका का सैंडल बरामद कर लिया गया है।

​कातिलों ने सोचा था कि नदी की रेत में वो अपना गुनाह हमेशा के लिए छुपा लेंगे, लेकिन वो भूल गए थे कि कानून के हाथ और विज्ञान की आंखें रेत के भीतर से भी सच को खींच लाती हैं। चतरा पुलिस और फॉरेंसिक टीम की मुस्तैदी ने साफ कर दिया कि गुनाह कितना भी शातिर क्यों न हो, उसका अंजाम सिर्फ और सिर्फ जेल की कालकोठरी ही है।

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