एलआईसी एजेंट बन बैठा सेटर: 9.90 लाख और 8.40 लाख के दो चेक बरामद, गारंटी में लिए लेते थे ब्लैंक चेक व डिग्रियां–
–सीआईडी ने एजेंट संदीप कुमार और राजेश प्रसाद यादव के संबंध में कोर्ट को दी जानकारी, इनके पास से बरामद हुए है दो बियरर चेक
राँची।जेएसएससी सीजीएल परीक्षा-2023 में हुए कथित प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच सीआईडी कर रही है। जैसे जैसे सीआईडी की जांच आगे बढ़ रही है इस मामले में लगातार कई नए खुलासे हो रहे है। सीआईडी ने इस संगठित सिंडिकेट के दो प्रमुख एजेंटों संदीप कुमार और राजेश प्रसाद यादव के बारे में कोर्ट को कई अहम जानकारी दी है जो चौकाने वाली है। सीआईडी ने कोर्ट को बताया है कि यह मामला केवल कुछ अभ्यर्थियों द्वारा नकल करने का नहीं, बल्कि कई राज्यों और अंतरराष्ट्रीय सीमा (नेपाल) तक फैले सुनियोजित गिरोह का है। अदालत में सीआईडी और अभियोजन पक्ष द्वारा पेश केस डायरी के अनुसार, आरोपी संदीप कुमार और राजेश प्रसाद यादव खुद को पेशेवर जीवन में एलआईसी एजेंट बताते थे, लेकिन पर्दे के पीछे वे प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को फांसने वाले दलाल का काम कर रहे थे। इन दोनों ने सह-आरोपी किशोर राणा के साथ मिलकर धर्मराज कुमार और राकेश रोशन नामक अभ्यर्थियों को सिंडिकेट के हवाले किया। चयन पक्का कराने के बदले लाखों रुपये की सौदेबाजी हुई। गारंटी के तौर पर अभ्यर्थी धर्मराज के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र और उसके हस्ताक्षर वाला एसबीआई का कोरा चेक जमा कराया गया। जांच एजेंसी ने इनके पास से दो बड़े बियरर चेक बरामद किए हैं। पहला 9,90,000 रुपये का चेक जो सीधे आरोपी राजेश प्रसाद यादव के नाम पर था, और दूसरा 8,40,000 रुपये का चेक जो नौखिलाल दास के नाम पर जारी था। सफल अभ्यर्थियों और उनके परिजनों के खातों से हुए वित्तीय लेन-देन के पुख्ता बैंक स्टेटमेंट भी अदालत में पेश किए गए है। सीआईडी ने दोनों को 15 सितंबर को गिरफ्तार किया था।
सीआईडी की टीम ने राजेश प्रसाद यादव को डोमचांच थाना क्षेत्र के गोलवाढाब से संदीप कुमार को कोडरमा थाना क्षेत्र के पूर्णानगर से पकड़ा था। जिन्हें राँची लाकर पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने इन दोनों की जमानत याचिका 8 अक्टूबर को खारिज की थी।
संदीप ने किशोर के साथ मिलकर अभ्यर्थी धर्मराज और राकेश को लाया
संदीप कुमार ने सह-अभियुक्त किशोर राणा के साथ मिलकर धर्मराज और राकेश रोशन दो अभ्यर्थी को सेट किया, जिन्हें बाद में निर्धारित स्थानों पर ले जाया गया जहां उन्हें रटने के लिए लीक की गई प्रश्न-उत्तर सामग्री दी गई थी। धर्मराज के हस्ताक्षर वाला एक मूल एसबीआई का ब्लैंक चेक तथा दो बियरर चेक की सीआईडी ने बरामद किए। जिनमें से एक 9,90,000 रुपये का चेक राजेश प्रसाद यादव के पक्ष में था और दूसरा 8,40,000 रुपये का चेक नौखिलाल दास के पक्ष में था। सीआईडी को वित्तीय जांच से यह भी संकेत मिला है संदीप ने सफल अभ्यर्थियों, उनके रिश्तेदारों और परीक्षा नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के साथ वित्तीय लेन-देन किए थे।
राजेश ने सेटिंग कराने वालों से अभ्यर्थियों का संपर्क कराया
सीआईडी के अनुसार राजेश प्रसाद यादव पेपर लीक नेटवर्क में बिचौलिए के रूप में काम कर रहा था। उसने सेटिंग कराने वालों से अभ्यर्थियों का संपर्क कराया। उसके बयान से पता चलता है कि उसने धर्मराज और राकेश रोशन को इस नेटवर्क से जोड़ा और उनके चयन के बदले मोटी रकम तय की गई थी। जांच से यह भी पता चला है कि तय रकम के भुगतान की सुरक्षा (गारंटी) के तौर पर अभ्यर्थियों से उनके मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र और हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक जमा करवाए गए थे। जांच एजेंसी ने लेन-देन से जुड़े बैंकिंग और चेक साक्ष्य एकत्र किए हैं। यह नेटवर्क बोकारो के दुगदा, आसनसोल के नियामतपुर, दुर्गापुर के सितुलपुर, नेपाल के बीरगंज और पटना तक फैला हुआ था, जहां अभ्यर्थियों को ले जाकर उत्तर रटवाए गए।
सिडिंकेट ने उत्तर रटवाने के लिए 5 गुप्त ठिकाने बनाए थे
सीआईडी ने कोर्ट को बताया है कि जांच में सिंडिकेट की जो कार्यप्रणाली सामने आई, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। गिरोह ने अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र लीक कराने और उत्तर रटवाने के लिए 5 मुख्य गुप्त ठिकाने बनाए थे। इसमें बीरगंज नेपाल में अभ्यर्थियों को इकट्ठा कर गोपनीय तरीके से पर्चा रटवाया गया। पश्चिम बंगाल दुर्गापुर के सितुलपुर में अभ्यर्थियों को लाकर प्रश्न-उत्तर याद कराए गए। आसनसोल पश्चिम बंगाल के नियामतपुर में परीक्षा से दो-तीन दिन पहले अभ्यर्थियों को एक मैरिज हॉल और होटलों में ठहराकर पूरी आंसर-की रटवाई गई। बोकारो के दुगदा में स्थानीय स्तर पर अभ्यर्थियों को एकत्र करने का प्रमुख गुप्त केंद्र बनाया गया था। बिहार में पटना में अभ्यर्थियों को सिंडिकेट के नेटवर्क में लाकर उत्तर उपलब्ध कराने का ठिकाना। इसके अलावा रांची, मांडू, मुजफ्फरपुर, दिल्ली और काठमांडू तक पर्चे के उत्तर बड़े पैमाने पर बांटे जाने के साक्ष्य सीआईडी को मिले हैं।

