लातेहार पुलिस और कोबरा का Special Operation ‘Kanti’ में दबोचा गया 30 साल से सक्रिय दुर्दांत नक्सली रवींद्र गंझू; भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार जब्त

लातेहार।झारखण्ड पुलिस और सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान में एक ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। 18 पुलिसकर्मियों के हत्या का आरोपी प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन के शीर्ष नेता और रिजनल कमिटी सदस्य सह जोनल कमांडर रविन्द्र गंझू उर्फ मुकेश गंझू उर्फ सुरेन्द्र गंझू को सुरक्षा बलों ने एक संयुक्त विशेष छापामारी अभियान के दौरान गिरफ्तार कर लिया है।गिरफ्तार माओवादी कमांडर पर झारखण्ड सरकार द्वारा 15 लाख रुपये और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था, जिससे उस पर कुल 20 लाख रुपये का इनाम था।उसके पास से एके-56 जैसे घातक स्वचालित हथियार और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए हैं।मंगलवार को अपने कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एसपी कुमार गौरव ने यह जानकारी दी।इस दौरान सीआरपीएफ के अधिकारी समेत कई अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

स्पेशल ऑप्स – कांति’ के तहत हुई कार्रवाई:
सीआरपीएफ के अधिकारी आईजी अभियान नरेंद्र सिंह और लातेहार एसपी कुमार गौरव को पुलिस को लगातार खुफिया सूचनाएं मिल रही थीं कि माओवादी कमांडर रविन्द्र गंझू अपने सहयोगी दस्ते के सदस्यों के साथ बेतर ओपी क्षेत्र में स्थित अपने पैतृक घर के आस-पास के गांवों हेसला बांझी टोला, रंगुनिया और कुडू के क्षेत्रों में घूम रहा है और किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में है।इन सूचनाओं के बाद एसपी कुमार के निर्देश पर एक संयुक्त विशेष छापामारी दल का गठन किया गया।इस दल में लातेहार पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा 209 बटालियन के सुरक्षा बल शामिल थे।12 जुलाई को चलाए गए इस विशेष अभियान के दौरान बांझी टोला गांव के बाहर जंगल से घेराबंदी कर रविन्द्र गंझू को विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया।
पी0 सी0 रिवन्द्र press release
AK-56 और पिस्टल समेत भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद
गिरफ्तारी के बाद जब संबंधित क्षेत्र में सर्च अभियान चलाया गया, तो भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार, गोलियां और अन्य सामग्रियां बरामद हुईं
30 वर्षों से संगठन में था सक्रिय, दर्ज हैं 154 कांड
43 वर्षीय रविन्द्र गंझू (पिता- रामब्रत गंझू, निवासी- हेसला बांझी टोला, चंदवा, लातेहार) पिछले लगभग 30 वर्षों से माओवादी संगठन से जुड़कर सक्रिय भूमिका निभा रहा था. वह वर्तमान में चंदवा, गुमला और लोहरदगा के त्रिकोणीय एरिया में बेहद सक्रिय रहकर आतंक फैला रहा था. विकास कार्यों में बाधा पहुंचाना, ठेकेदारों और कंपनियों से लेवी वसूलना, आम जनता को डराना और सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाना उसका मुख्य काम था. रविन्द्र गंझू के खिलाफ झारखंड के विभिन्न थानों में कुल 154 आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें सबसे अधिक लोहरदगा में 87, लातेहार में 40 और गुमला जिले में 27 मामले दर्ज हैं.
कई बड़े नक्सली हमलों का रहा है मास्टरमाइंड
– रविन्द्र गंझू का आपराधिक इतिहास बेहद खौफनाक रहा है. वह सुरक्षा बलों पर हुए कई जघन्य हमलों में सीधे तौर पर शामिल रहा है, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं.
– कटिया जंगल हमला (2013): बरवाडीह के कटिया जंगल में ‘ऑपरेशन सामना’ के दौरान सुरक्षा बलों पर घात लगाकर किए गए अंधाधुंध हमले में सीआरपीएफ के 11 जवान शहीद हो गए थे, 15 घायल हुए थे और चार ग्रामीणों की भी मौत हुई थी. इसके बाद जवानों के शव के नीचे आईईडी बम लगाकर 3 और ग्रामीणों की जान ली गई थी.
– चंदवा पीसीआर वाहन हमला (2019): चंदवा थाना क्षेत्र के लुकइया मोड़ के पास नक्सलियों ने पीसीआर वाहन पर हमला कर चार पुलिसकर्मियों को शहीद कर दिया था और उनके हथियार (पिस्टल, राइफलें और कारतूस) लूट लिए थे।
– कोने स्कूल हमला (2011): लातेहार के कोने स्थित राजकीयकृत मध्य विद्यालय में सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस बल पर हमला किया गया था, जिसमें बम ब्लास्ट कर स्कूल की इमारत गिरा दी गई थी और जगुआर के सात जवान जख्मी हुए थे।
– घाघु में बारूदी सुरंग विस्फोट (2012): बालूमाथ के सुरंगी टोगरी के पास पुलिस की गाड़ी को उड़ाया गया था, जिसमें तीन पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।
– रेलवे ट्रैक और गाड़ियों को फूंकना: इसके अलावा उसने लातेहार में डेमू-रिचूघुटा के बीच रेलवे पटरी को बम से उड़ाने, महुआडांड में लेवी न मिलने पर रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी के नौ वाहनों को फूंकने और जंगलों में प्रेशर बम लगाकर कई निर्दोष ग्रामीणों व महिलाओं की जान लेने जैसी दर्जनों घटनाओं को अंजाम दिया था।
बरामद अत्याधुनिक हथियारों और गोला-बारूद की सूची:
सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने नक्सली के पास से निम्नलिखित हथियार और गोलियां बरामद की हैं:
AK-56 स्वचालित हथियार: 01 पीस
AK-56 की मैगजीन: 02 पीस एवं 180 चक्र जिंदा कारतूस
7.65 mm ऑटोमैटिक पिस्टल: 01 पीस
7.65 mm पिस्टल की मैगजीन: 02 पीस एवं 12 चक्र जिंदा कारतूस
देशी राइफल (सिंगल बैरल): 01 पीस
5.56 mm का जिंदा कारतूस: 21 चक्र
.303 का जिंदा कारतूस: 16 चक्र
काले रंग का पाउच: 01 पीस
छापेमारी दल में शामिल जांबाज अधिकारी और बल:
इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में मुख्य रूप से शामिल थे:
दीपक कुमार, उप कमांडेंट, कोबरा 209 बटालियन
रितेश कुमार राव, पु०अ०नि० (SI) सह ओ०पी० प्रभारी, बेतर
रितेश तिग्गा, पु०अ०नि० (SI), बेतर ओ०पी०
मजलु कालिंदी, स०अ०नि० (ASI), सैट-45 (प्रभारी)
कोबरा-209 के सशस्त्र बल
सैट (SAT)-45 के सशस्त्र बल (बेतर ओ०पी०)
आरक्षी 582 राहुल कुमार दुबे
आरक्षी 1309 पियूष पन्ना
रवींद्र गंझू की गिरफ्तारी को झारखण्ड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत एक बहुत बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिससे लातेहार, लोहरदगा और गुमला जिलों में माओवादी संगठन को एक बड़ा झटका लगा है।

