​NIA का बड़ा खुलासा: लेवी, हवाला और हथियारों के दम पर ‘मगध जोन’ को दोबारा जिंदा करने की थी साजिश

-महाराष्ट्र में छिपा था जहानाबाद का माओवादी चंदन, तीसरी पूरक चार्जशीट में खुला नेटवर्क का पूरा ब्लूप्रिंट

राँची।बिहार-झारखण्ड के सीमावर्ती इलाकों में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) द्वारा अपने पुराने गढ़ ‘मगध जोन’ को दोबारा खड़ा करने की साजिश का राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बड़ा खुलासा किया है।राँची की विशेष एनआईए अदालत में दाखिल तीसरी पूरक चार्जशीट में एजेंसी ने उस पूरे कॉरपोरेट/सिंडिकेट मॉडल को बेनकाब किया है, जिसके जरिए लेवी, हवाला और हथियारों के नेटवर्क को जोड़कर बड़े हमलों की तैयारी की जा रही थी।जांच में सामने आया है कि जहानाबाद निवासी माओवादी चंदन कुमार इस नेटवर्क का मुख्य फाइनेंशियल और ऑपरेशनल मैनेजर बनकर काम कर रहा था।वह न केवल बाहर सक्रिय ओवर ग्राउंड वर्कर्स के जरिए फंडिंग और लॉजिस्टिक्स संभाल रहा था, बल्कि देश की अलग-अलग जेलों में बंद माओवादी कैडरों से भी लगातार संपर्क में था।एजेंसी के मुताबिक, इसी नेटवर्क के जरिए मगध जोन में एक बार फिर हिंसक गतिविधियों को तेज करने की साजिश रची जा रही थी।

एनआईए की कांड संख्या RC-05/2021/NIA/RNC की जांच में यह भी सामने आया कि माओवादियों ने फंड जुटाने के लिए पूरी तरह कॉरपोरेट स्टाइल अपनाया था।विकास योजनाओं में लगे ठेकेदारों को डराकर उनसे मोटी लेवी वसूली जाती थी। वसूली गई इस रकम को हवाला और अन्य गुप्त चैनलों के जरिए हथियार तस्करों तक पहुंचाया जाता था, ताकि बड़े पैमाने पर आधुनिक हथियार और गोला-बारूद खरीदे जा सकें।इसके साथ ही संगठन छोड़ चुके पुराने लड़ाकों को ज्यादा पैसे और प्रलोभन देकर दोबारा दस्ते में शामिल करने की भी कोशिश हो रही थी।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि चंदन कुमार ने जेल में बंद नक्सलियों, बाहर सक्रिय ओजीडब्ल्यू और ग्राउंड कैडरों के बीच एक त्रिकोणीय नेटवर्क तैयार किया था। इस मॉडल के तहत जेल से रणनीति बनती थी, ओजीडब्ल्यू शहरों में रहकर फंडिंग और सप्लाई चेन संभालते थे, जबकि ग्राउंड कैडर हथियारों के साथ घटनाओं को अंजाम देने की तैयारी में थे।एजेंसी का मानना है कि इस नेटवर्क के जरिए एक साथ कई इलाकों में हिंसा भड़का कर सुरक्षा ग्रिड को चुनौती देने की योजना थी।

चंदन कुमार को अक्टूबर 2023 में अदालत द्वारा फरार घोषित किए जाने और गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद वह राज्य छोड़कर भाग गया था। एनआईए ने तकनीकी सर्विलांस और इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर जनवरी 2026 में उसे महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया, जिसे सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।

इस मामले में एनआईए दिसंबर 2021 से जांच कर रही है और अब तक कुल छह आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। इनमें 25 लाख के इनामी स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य प्रद्युमन शर्मा, सशस्त्र दस्ता सदस्य योगेंद्र रविदास और नागेंद्र गिरी, मुख्य हथियार सप्लायर अभिनव उर्फ बिट्टू, नेटवर्क हैंडलर धनंजय पासवान और ताजा चार्जशीटेड चंदन कुमार शामिल हैं।

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