NIA जांच में चौंकाने वाला खुलासा: BSF कैंपों से चोरी के कारतूस नक्सलियों तक पहुंचाए जा रहे थे

राँची।राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में एक बड़े अवैध कारतूस तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। जांच के मुताबिक, बीएसएफ के फिरोजपुर, जालंधर, जैसलमेर और जम्मू स्थित कैंपों से सरकारी कारतूस चोरी कर अपराधी गिरोहों और नक्सली संगठनों तक पहुंचाए जा रहे थे।
एनआईए के अनुसार, इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड बीएसएफ का पूर्व सिपाही अरुण कुमार सिंह उर्फ “फौजी” था। वह बीएसएफ के तत्कालीन एम्युनिशन एमसीयू कार्तिक बेहरा की मदद से महज 100 रुपये प्रति कारतूस के हिसाब से सरकारी गोलियां हासिल करता था और उन्हें 400 रुपये प्रति कारतूस की दर से अपराधियों व नक्सलियों को बेच देता था।
जांच में सामने आया कि अरुण कुमार सिंह 1992 में बीएसएफ में भर्ती हुआ था और 2003 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। मणिपुर में तैनाती के दौरान उसकी दोस्ती कार्तिक बेहरा से हुई थी। कार्तिक ने अपने भाई की नौकरी के लिए अरुण से दो लाख रुपये उधार लिए थे। बाद में रकम लौटाने में असमर्थ रहने पर उसने कारतूसों की अवैध सप्लाई का प्रस्ताव रखा।
एनआईए के मुताबिक, कार्तिक फायरिंग अभ्यास के दौरान बची हुई गोलियों को रिकॉर्ड में इस्तेमाल दिखाकर हजारों कारतूस अपने पास छिपा लेता था। बाद में वही कारतूस अरुण को सौंप दिए जाते थे। वर्ष 2016 में ही उसने 9 एमएम और एके-47 के कुल 945 राउंड कारतूस अरुण को उपलब्ध कराए थे।
जांच में यह भी सामने आया कि अरुण कारतूसों की खेप लेने के लिए सड़क और ट्रेन के जरिए बीएसएफ कैंपों तक पहुंचता था। एनआईए ने फिरोजपुर समेत कई शहरों के होटल रजिस्टरों की जांच कर उसके ठहरने और कार्तिक बेहरा के साथ उसके संपर्क की पुष्टि होने का दावा किया है।
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