झारखण्ड में नया ट्रेंड, समस्या घर की, समाधान ऊंचे टावर पर:पलामू में हाई-वोल्टेज पारिवारिक ड्रामा,जमीन से 100 फीट ऊपर हुआ युवक के गुस्से का लाइव टेलीकास्ट….
पलामू।झारखण्ड के पलामू जिले के चैनपुर क्षेत्र के रहने वाले विनोद चौधरी का शुक्रवार को अपने घर के दो सबसे पावरफुल विभागों—’गृह मंत्रालय’ (पत्नी) और ‘वित्त मंत्रालय’ (पिता) से तगड़ा विवाद हो गया। अमूमन ऐसी स्थिति में लोग घर से बाहर जाकर दो कप चाय पीते हैं और गुस्सा शांत कर लेते हैं। लेकिन विनोद बाबू ठहरे ‘अतरंगी खिलाड़ी’। उन्होंने गुस्सा शांत करने के लिए सीधे आसमान का रुख किया और पास ही मौजूद 100 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर ‘स्पाइडर-मैन’ स्टाइल में चढ़ गए।विनोद जैसे ही टावर के शिखर पर पहुंचे, नीचे जमीन पर दर्शकों (ग्रामीणों) का मेला लग गया। लोग नीचे से चिल्ला रहे थे—”अरे विनोद बाबू, नीचे आ जाओ, पैर फिसल गया तो सीधे ऊपर का नेटवर्क पकड़ लोगे।लेकिन विनोद जी तो जैसे अंतरिक्ष मिशन पर थे। उन्होंने नीचे झांककर साफ कह दिया-“छोटे-मोटे लोगों से बात नहीं करूंगा। जब तक पुलिस डिपार्टमेंट के बड़े अफसर ऑन-स्पॉट नहीं आते, मैं नीचे कदम नहीं रखूंगा।”
करीब 45 मिनट तक पलामू की जनता और विनोद के परिजनों की सांसें अटकी रहीं। पूरे इलाके में ऐसा माहौल था जैसे कोई हॉलीवुड की सस्पेंस फिल्म चल रही हो।
आखिरकार इस ड्रामे का क्लाइमेक्स तब आया जब खुरा पुलिस पिकेट के जवान और चैनपुर थाना प्रभारी लाल जी खुद मोर्चे पर आए। पुलिस ने नीचे से लाउडस्पीकर पर विनोद को पुचकारा, समझाया और ‘कानूनी दुलार’ दिखाया। पुलिस की बातें सुनते ही विनोद बाबू का पारा 5G की स्पीड से सीधे 2G पर आ गया। वह चुपचाप, बिना किसी नखरे के टावर से नीचे उतर आए। नीचे आते ही परिजनों ने राहत की सांस ली और उन्हें समझा-बुझाकर घर ले गए।
झारखण्ड का नया ट्रेंड—”हर मर्ज की एक दवा, टावर पर चढ़ जाओ मेरे भाई” !
अब आते हैं कहानी के सबसे जरूरी और गंभीर हिस्से पर। झारखण्ड में आजकल यह एक बेहद अजीब और खतरनाक ट्रेंड बन चुका है।
जैसे:
प्रेमी-प्रेमिका में अनबन?-टावर पर चढ़ जाओ।
जमीन का कागज नहीं मिला? -टावर पर चढ़ जाओ।
शराबी को शराब के पैसे नहीं मिले? टावर पर चढ़ जाओ।
और अब… घर में बीवी-पिता से कहासुनी हुई? – सीधे 100 फीट ऊंचे टावर पर चढ़ जाओ!
यह ‘शोले’ फिल्म का वीरू वाला स्टाइल रील लाइफ में तो ताली बजवाता है, लेकिन रियल लाइफ में यह जानलेवा है। मोबाइल टावर सिग्नल सुधारने के लिए हैं, पारिवारिक झगड़ों का ‘कोर्ट रूम’ बनने के लिए नहीं। अब झारखण्ड पुलिस और प्रशासन को ऐसे ‘स्टंटबाजों’ पर सख्त कानूनी एफआईआर दर्ज करनी चाहिए, ताकि अगली बार कोई भी घर की किचकिच का बदला बेचारे मोबाइल टावर से न ले।

