मुसीबत की घड़ी में सिविल सर्जन ने ममता देवी को किया याद..ममता ने बिना देर किए चुनौती कर ली स्वीकार..ममता की दिलेरी की हो रही चौतरफा तारीफ
चतरा।झारखण्ड के चतरा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने समाज में महिलाओं की भूमिका को लेकर नई सोच को जन्म दिया है चतरा का सदर अस्पताल अब राज्य का पहला ऐसा अस्पताल बन गया है, जहां एक महिला ने पुरुष के शव का पोस्टमार्टम किया यह कदम न सिर्फ साहसिक है, बल्कि पारंपरिक धारणाओं को भी चुनौती देता है इस घटना के बाद पूरे इलाके में ममता देवी की चर्चा हो रही है शहर के बिंड मोहल्ला निवासी ममता देवी, जो दीपू सिंह की पत्नी हैं, ने यह साहसिक कार्य किया। उन्होंने अपने जीवन का पहला पोस्टमार्टम सड़क दुर्घटना में मृत राजेश शर्मा के शव का किया। यह काम सामान्य नहीं माना जाता, क्योंकि पोस्टमार्टम के दौरान कई कठिन और संवेदनशील प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इसके बावजूद ममता देवी ने बिना किसी हिचकिचाहट के यह जिम्मेदारी निभाई।इतना ही नहीं, पहले पोस्टमार्टम के लगभग एक घंटे बाद लावालौंग से आए एक और शव का पोस्टमार्टम भी उन्होंने किया। लगातार दो पोस्टमार्टम कर ममता देवी ने यह साबित कर दिया कि महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी क्षमता दिखा सकती हैं।
दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम अचानक बने हालात का नतीजा था।सदर अस्पताल के नियमित पोस्टमार्टम कर्मी सुखदेव राम पर एक दिन पहले ही 5000 रुपये लेने का आरोप लगा था। इस आरोप के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें काम से रोक दिया था।जब राजेश शर्मा का शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल लाया गया, तब कोई अन्य कर्मचारी उपलब्ध नहीं था। सुखदेव राम जिले का एकमात्र पोस्टमार्टम कर्मी था और उसने काम करने से साफ इनकार कर दिया।अस्पताल प्रबंधन ने काफी कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया।
इसी दौरान अस्पताल प्रबंधन को ममता देवी की याद आई। ममता देवी ने कुछ दिन पहले ही सिविल सर्जन को आवेदन देकर बताया था कि वह पिछले 15 वर्षों से निजी अस्पतालों में नर्स के रूप में काम कर रही हैं और उन्हें रोजगार की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा था कि वह पोस्टमार्टम का कार्य करने में सक्षम हैं।मुसीबत की इस घड़ी में सिविल सर्जन ने उन्हें फोन किया।ममता देवी ने बिना देर किए चुनौती स्वीकार कर ली और मात्र 10 मिनट के भीतर पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गईं। वहां उन्होंने अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ पंकज कुमार और डॉ अजहर के साथ मिलकर सफलतापूर्वक पोस्टमार्टम किया।
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ पंकज कुमार ने ममता देवी की जमकर तारीफ की।उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम के दौरान शव पर काम करना आसान नहीं होता, कई अनुभवी लोग भी घबरा जाते हैं।लेकिन ममता देवी ने पहली ही बार में बेहद कुशलता और आत्मविश्वास के साथ सभी प्रक्रियाएं पूरी कीं। उन्होंने यह भी कहा कि आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं और ममता देवी इसका जीता-जागता उदाहरण हैं।उनकी यह पहल अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
अस्पताल प्रबंधन ने संकेत दिए हैं कि ममता देवी को जल्द ही पोस्टमार्टम कर्मी के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। डॉ पंकज कुमार के अनुसार, एक से दो दिनों के भीतर इस पर निर्णय लिया जाएगा। यदि ऐसा होता है, तो यह न सिर्फ ममता देवी के लिए बड़ी उपलब्धि होगी, बल्कि राज्य में महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक अहम कदम साबित होगा।
यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि समाज में बदलती सोच का प्रतीक है। जहां पहले कुछ कामों को केवल पुरुषों तक सीमित माना जाता था, वहीं अब महिलाएं उन क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रही हैं।
चतरा सदर अस्पताल की यह पहल और ममता देवी का साहस आने वाले समय में कई महिलाओं को प्रेरित करेगा।यह साबित करता है कि अवसर मिलने पर महिलाएं किसी भी चुनौती को पार कर सकती हैं और समाज में नई मिसाल कायम कर सकती हैं।

