झारखण्ड में छात्रों का उबाल:राँची, हजारीबाग और गिरिडीह में पुतला दहन को लेकर बवाल, पुलिस से झड़प और JMM कार्यकर्ताओं पर मारपीट के आरोप

राँची। JPSC-JSSC नियुक्ति विवाद को लेकर झारखण्ड में छात्रों का आक्रोश शुक्रवार को सड़क पर साफ दिखाई दिया। सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के तहत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पुतला दहन करने पहुंचे छात्रों को कई जगह प्रशासन और झारखण्ड मुक्ति मोर्चा(जेएमएम) कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा। राँची, हजारीबाग और गिरिडीह में प्रदर्शन के दौरान तनाव, मारपीट,धक्का-मुक्की और झड़प की घटनाएं सामने आईं।
हजारीबाग में हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं गांधी मैदान पहुंचे, तो गिरिडीह के झंडा मैदान में छात्रों और झामुमो कार्यकर्ताओं के बीच विवाद बढ़ गया। राजधानी राँची के अल्बर्ट एक्का चौक पर भी पुतला छीनने को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। घटनाओं के बाद छात्र संगठनों ने प्रशासन की भूमिका और राजनीतिक हस्तक्षेप पर सवाल उठाए हैं।
हजारीबाग में हजारों छात्र गांधी मैदान पहुंचे, पुलिस से हुई झड़प
जेपीएससी-जेएसएससी नियुक्ति मामले को लेकर शुक्रवार शाम हजारीबाग में छात्रों का गुस्सा चरम पर दिखा। हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पुतला लेकर गांधी मैदान पहुंचे। छात्रों के हाथों में पुतले थे और वे सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर रहे थे।प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम गांधी मैदान पहुंची। प्रशासन ने पुतला दहन रोकने और छात्रों को मैदान से हटाने का प्रयास किया। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और झड़प की स्थिति बन गई।प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि उन्हें हटाने के दौरान पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किया गया, जिसमें कुछ छात्र आंशिक रूप से घायल हुए। हालांकि प्रशासन ने स्थिति को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया कदम बताया है।
छात्रों का आरोप-भीड़ में लाठी लेकर पहुंचे JMM कार्यकर्ता
हजारीबाग की घटना में छात्रों ने झामुमो कार्यकर्ताओं पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भीड़ के बीच झामुमो से जुड़े कुछ लोग लाठी लेकर पहुंचे और छात्रों के साथ मारपीट की। इससे गांधी मैदान में तनाव और बढ़ गया।हालांकि झामुमो से जुड़े लोगों ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि यदि कहीं विवाद हुआ तो वह बचाव की स्थिति में हुआ।मामले को लेकर जेएसएससी-जेपीएससी रिफॉर्म मंच ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।गांधी मैदान में बतौर मजिस्ट्रेट मौजूद सदर अंचल अधिकारी आशुतोष कुमार ने कहा कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि गांधी मैदान में पुतला दहन नहीं हुआ।उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था को बनाए रखना है और किसी भी परिस्थिति में स्थिति को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा।वहीं, रिफॉर्म मंच के सदस्य विनय मेहता ने आरोप लगाया कि सरकार ने विभिन्न नियुक्तियों को रद्द करने का निर्णय लिया था, लेकिन मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद सरकार न्यायालय में अपना पक्ष प्रभावी तरीके से नहीं रख सकी। इसके बाद हाईकोर्ट ने कैबिनेट के फैसले पर रोक लगा दी।विनय मेहता ने सवाल उठाया कि यदि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे थे तो प्रदर्शनकारियों के बीच झामुमो से जुड़े लोग लाठी लेकर क्यों पहुंचे। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की।
गिरिडीह में झंडा मैदान पर छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटने का आरोप
हजारीबाग के बाद गिरिडीह में भी पुतला दहन को लेकर जमकर विवाद हुआ। नगर थाना क्षेत्र के झंडा मैदान में मुख्यमंत्री का पुतला दहन करने पहुंचे छात्रों और झामुमो कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई।छात्रों का आरोप है कि झामुमो कार्यकर्ताओं ने पुतला दहन का विरोध करते हुए उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि कुछ छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। इस दौरान झंडा मैदान में अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई।बताया जा रहा है कि घटनाक्रम के कुछ हिस्से सीसीटीवी कैमरों में कैद हुए हैं। इससे पूरे मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल सकते हैं। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना रहा।
राँची के अल्बर्ट एक्का चौक पर पुतला छीनने को लेकर आमने-सामने हुए कार्यकर्ता
राजधानी राँची में भी शुक्रवार शाम JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान विवाद हो गया। मंच के छात्र कार्यकर्ता अल्बर्ट एक्का चौक पर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे।रिफॉर्म मंच का आरोप है कि इसी दौरान झामुमो कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और छात्रों से पुतला छीनने लगे। पुतला छीनने को लेकर दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते वहां धक्का-मुक्की और हंगामे की स्थिति पैदा हो गई।मंच के नेता रविंद्र पासवान ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद छात्रों में नाराजगी है और इसी के विरोध में पुतला दहन का कार्यक्रम रखा गया था। उनका कहना है कि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे थे, लेकिन झामुमो कार्यकर्ताओं के हस्तक्षेप के बाद विवाद की स्थिति बनी।
मौके पर मौजूद पुलिस-प्रशासन ने दोनों पक्षों को अलग कर स्थिति को नियंत्रित किया।
24 जिला मुख्यालयों पर आंदोलन का ऐलान
JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच की ओर से शुक्रवार को राज्य के सभी 24 जिला मुख्यालयों में पुतला दहन का कार्यक्रम आयोजित करने का ऐलान किया गया था। छात्रों का यह आंदोलन नियुक्ति से जुड़े विवादों, परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और सरकार के फैसलों के खिलाफ है।हजारीबाग, गिरिडीह और राँची में जहां कार्यक्रम के दौरान विवाद की स्थिति बनी, वहीं अन्य जिला मुख्यालयों में भी छात्रों ने सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। हालांकि शुक्रवार देर शाम तक उपलब्ध सूचनाओं में अन्य जिलों में राँची, हजारीबाग और गिरिडीह जैसी गंभीर झड़प की स्पष्ट पुष्टि सामने नहीं आई है।
बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर साधा निशाना
घटनाओं को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन कई जगह झामुमो कार्यकर्ताओं ने उनके साथ गुंडागर्दी की।मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि छात्र किसी मामले में CBI जांच की मांग कर रहे हैं तो सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए।
उन्होंने हजारीबाग और गिरिडीह की घटनाओं का जिक्र करते हुए झामुमो पर निशाना साधा और कहा कि सरकार को अपने कार्यकर्ताओं को संयम बरतने के लिए कहना चाहिए।
आंदोलन ने लिया राजनीतिक रंग
JPSC-JSSC नियुक्ति विवाद को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब धीरे-धीरे राजनीतिक टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है। एक ओर छात्र संगठन सरकार पर अपने वादों से पीछे हटने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ दल से जुड़े कार्यकर्ता छात्रों के आरोपों को खारिज कर रहे हैं।हजारीबाग में पुलिस और छात्रों के बीच टकराव, गिरिडीह में झामुमो कार्यकर्ताओं पर मारपीट के आरोप और राँची में पुतला छीनने को लेकर हुआ विवाद इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि छात्रों की मांगों पर सरकार क्या रुख अपनाती है और शुक्रवार की घटनाओं में लगाए गए मारपीट तथा बल प्रयोग के आरोपों की जांच किस स्तर पर होती है। यदि सरकार और छात्र संगठनों के बीच जल्द संवाद नहीं हुआ तो JPSC-JSSC नियुक्ति विवाद एक बार फिर झारखण्ड की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।

