‘डिजिटल अरेस्ट’ गिरोह का भंडाफोड़: सीआईडी ने राँची के विवेक नारसरिया को दबोचा…11 राज्यों में ठगी कर चुका है…
–सीआईडी साइबर थाना की कार्रवाई; वीडियो कॉल पर डराकर ठगते थे पैसे, म्यूल अकाउंट से होता था ट्रांजेक्शन
राँची।साइबर अपराध पर शिकंजा कसते हुए अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के साइबर थाना ने बड़ी सफलता हासिल की है। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर देशभर में ठगी करने वाले गिरोह से जुड़े एक आरोपी को झारखण्ड की राजधानी राँची से गिरफ्तार किया गया है। यह आरोपी 11 अलग-अलग मामलों में शामिल था, जो विभिन्न राज्यों में दर्ज हैं। सीआईडी साइबर थाना में दर्ज कांड संख्या 13/26 के तहत जांच के दौरान इस गिरोह का खुलासा हुआ। पुलिस के मुताबिक आरोपी “म्यूल बैंक खातों” के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर करता था। गिरफ्तार आरोपी की पहचान विवेक नारसरिया, निवासी अरगोड़ा थाना क्षेत्र,राँची के रूप में हुई है।
जांच में सामने आया कि यह गिरोह खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल और फोन कॉल करता था। इसके बाद पीड़ितों को मनी लॉन्ड्रिंग या किसी गंभीर आपराधिक मामले में फंसाने की झूठी बात कहकर डराया जाता था। इसके बाद उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर लगातार निगरानी में रखा जाता था और उनसे कहा जाता था कि वे अपनी रकम “वेरिफिकेशन” या “सेफ अकाउंट” में ट्रांसफर करें। इसी बहाने उनसे लाखों रुपए की ठगी की जाती थी।
सीआईडी ने तकनीकी जांच और डिजिटल ट्रेल के आधार पर म्यूल बैंक खातों की पहचान की। खातों में हुए ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर और डिजिटल साक्ष्यों को खंगालते हुए आरोपी तक पहुंच बनाई गई। इसके बाद टीम ने राँची में छापेमारी कर विवेक नारसरिया को गिरफ्तार कर लिया।पुलिस ने आरोपी के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं, जिनकी जांच जारी है। आशंका है कि इस गिरोह से जुड़े और भी लोग जल्द गिरफ्त में आ सकते हैं।
ऐसे बचें ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी से
-कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे की मांग नहीं करती
-“डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती
-अनजान कॉल पर खुद को अधिकारी बताने वालों पर भरोसा न करें
-दबाव में आकर कभी भी पैसे ट्रांसफर न करें
-ठगी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें

