झारखण्ड में बड़ी प्रशासनिक गाज: 6 करोड़ से अधिक के गबन के आरोपी झाप्रसे अफसर आशुतोष कुमार सस्पेंड
राँची।भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ी कार्रवाई की है। झारखण्ड प्रशासनिक सेवा (झाप्रसे) के अधिकारी और चतरा के तत्कालीन कार्यपालक दण्डाधिकारी-सह-प्रभारी जिला कल्याण पदाधिकारी, आशुतोष कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है। सरकार ने यह निलंबन पिछली तिथि (10 फरवरी 2021) से प्रभावी किया है।
क्या है पूरा मामला और गंभीर आरोप
चतरा में तैनाती के दौरान अधिकारी आशुतोष कुमार पर वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग से जुड़े कुल 8 बेहद गंभीर आरोप लगे थे। विभागीय जांच के बाद इन आरोपों के आधार पर सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है।
मुख्य आरोपों की सूची
₹6.48 करोड़ की अवैध निकासी:कुल 43 संदिग्ध बैंक ट्रांसफर के जरिए सरकारी खजाने से 6 करोड़ 48 लाख रुपये की अनधिकृत निकासी की गई।
वरिष्ठ अधिकारियों से सच छिपाना: कार्यालय में हुए एक अग्निकांड के दौरान महत्वपूर्ण ‘कैश बुक’ जलने की बात उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से छिपाए रखी।
छात्रवृत्ति घोटाले को बढ़ावा: छात्रों को मिलने वाली स्कॉलरशिप की राशि को नियमों के विपरीत, नाजिर (Nazir) के परिवार के सदस्यों के निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
नियमों को ताक पर रखकर भुगतान: एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) अधिकारी को सभी नियमों को दरकिनार करते हुए 98.34 लाख रुपये का अग्रिम (एडवांस) भुगतान कर दिया गया।
विभागीय रुख:
राज्य सरकार के इस कड़े फैसले से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि जनता के पैसों के गबन और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। सस्पेंशन की अवधि के दौरान नियमानुसार आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

