राजधानी राँची में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का ख़ौफ़नाक खेल: 73 साल के बुजुर्ग को दो दिनों तक घर में कैद रखा, ठग लिए 5.20 लाख रुपये…

 

राँची। राजधानी राँची  के सुखदेवनगर थाना क्षेत्र में साइबर अपराधियों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए एक 73 वर्षीय बुजुर्ग के साथ 5.20 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। ठगों ने खुद को मुंबई क्राइम डिपार्टमेंट और दिल्ली सीबीआई का अधिकारी बताकर पीड़ित कंचन सरकार को दो दिनों तक उनके ही घर में ‘डिजिटल’ तरीके से कैद रखा। डरे हुए बुजुर्ग ने अंततः अपनी जीवन भर की कमाई ठगों के बताए आईसीआईसीआई बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी।

2 अप्रैल को ठगों ने ‘जांच’ के नाम पर बुजुर्ग को बैंक ऑफ बड़ौदा, रातू रोड शाखा भेजा। उन्हें सख्त निर्देश दिया गया कि बैंक मैनेजर को कुछ न बताएं क्योंकि वह भी घोटाले में शामिल है। बुजुर्ग ने डर के मारे ठगों के दिए खाते में 5,20,000 आरटीजीएस कर दिए। ठगों ने वादा किया था कि पैसा “सफेद” पाए जाने पर आधे घंटे में वापस कर दिया जाएगा। बुजुर्ग ने साइबर थाना राँची में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

रची हर्षद मेहता और मनी लॉन्ड्रिंग की मनगढ़ंत कहानी

ठगी की शुरुआत 30 मार्च को एक व्हाट्सएप कॉल (नंबर- 8160196844) से हुई, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया। उसने पीड़ित को यह कहकर डराया कि उसका नाम चर्चित ‘हर्षद मेहता’ प्रकरण और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है। ठग ने दावा किया कि पीड़ित के नाम पर चार फर्जी बैंक खाते खोले गए हैं, जिनमें हवाला का पैसा आ रहा है। इसके बाद आरोपी ने झूठी कहानी गढ़ते हुए कहा कि इन खातों में आने वाली रकम पर पीड़ित को प्रति खाता ₹90,000 कमीशन और अतिरिक्त 2 प्रतिशत हिस्सा मिल रहा है। इस तरह कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय दिखाकर उसे मानसिक दबाव में लिया गया, ताकि आगे ठगी को अंजाम दिया जा सके।

‘दरवाजा बंद कर लो, पुलिस मिली हुई है’

ठगों ने बुजुर्ग को पूरी तरह मानसिक रूप से तोड़ने के लिए दूसरे नंबर (9025161039) से खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर फोन किया। उन्होंने झूठा दावा किया कि स्थानीय पुलिस और बैंक अधिकारी भी इस मामले में शामिल हैं, इसलिए वे खुद गुप्त जांच कर रहे हैं। इसके बाद पीड़ित को ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ के नाम पर घर का दरवाजा बंद करने और किसी से भी संपर्क न करने की सख्त हिदायत दी गई।

डर का माहौल ऐसा बनाया गया कि उन्हें यह तक कहा गया कि बात बाहर गई तो जान का खतरा हो सकता है। ठगों ने लगातार दो दिनों तक वीडियो कॉल और फोन के जरिए बुजुर्ग पर नजर रखी। इस दौरान घर में काम करने वाली दाई को भी जल्द भेज देने का दबाव बनाया गया, ताकि पीड़ित पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाए। डर और भ्रम की स्थिति का फायदा उठाकर आरोपियों ने बुजुर्ग से उनकी पूरी आर्थिक जानकारी निकलवा ली।बैंक खाते में जमा राशि, एफडी और सोने-चांदी तक का पूरा ब्यौरा।

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