राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को किसने दिया धोखा? हार के बाद महागठबंधन में मचा घमासान

 

राँची।झारखण्ड राज्यसभा चुनाव के नतीजे सामने आते ही महागठबंधन में सियासी भूचाल आ गया है। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार के बाद पार्टी ने अपने सहयोगियों पर ही धोखा देने का आरोप लगा दिया है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू ने सीधे तौर पर राजद और माले पर वोट न देने का आरोप लगाया, जिसके बाद गठबंधन के भीतर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव में झामुमो के बैद्यनाथ राम और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। हैरानी की बात यह है कि चुनाव से पहले महागठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने लायक संख्या बल मौजूद था, फिर भी कांग्रेस उम्मीदवार को केवल 20 वोट ही मिले।

कांग्रेस का आरोप: सहयोगियों ने दिया धोखा

नतीजों के बाद कांग्रेस ने दावा किया कि राजद और माले के विधायकों ने गठबंधन धर्म नहीं निभाया, जिसके कारण उनके उम्मीदवार को हार झेलनी पड़ी। कांग्रेस का आरोप है कि सहयोगी दलों की कथित क्रॉस वोटिंग ने पूरा समीकरण बिगाड़ दिया।

राजद का पलटवार: “कांग्रेस ने ही कांग्रेस को हराया”

कांग्रेस के आरोपों पर राजद विधायक और मंत्री संजय प्रसाद यादव ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले यह बताए कि उसके किस विधायक ने क्रॉस वोटिंग की है। संजय यादव ने दावा किया कि राजद के सभी विधायकों ने पार्टी लाइन के अनुसार मतदान किया और अपने वोट पोलिंग एजेंट को दिखाकर ही डाले।
उन्होंने कहा, “राजद के नेता मरना पसंद करेंगे लेकिन भाजपा से समझौता कभी नहीं करेंगे। कांग्रेस को अपने घर के भीतर झांकने की जरूरत है।”
राजद ने साफ कहा कि अगर कहीं क्रॉस वोटिंग हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन बिना सबूत सहयोगी दलों पर आरोप लगाना उचित नहीं है।

नतीजों ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किलें

मतगणना के बाद विधानसभा परिसर में भाजपा समर्थकों के नारे गूंजने लगे, जबकि कांग्रेस खेमे में मायूसी साफ दिखाई दी। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा ने हार स्वीकार करते हुए सभी समर्थक विधायकों का आभार जताया और विजयी उम्मीदवारों को बधाई दी।

मतगणना के अनुसार:
झामुमो के बैद्यनाथ राम को 30 वोट मिले
निर्दलीय परिमल नाथवानी को 28 वोट मिले
कांग्रेस के प्रणव झा को केवल 20 वोट मिले
3 वोट अवैध घोषित किए गए

बड़ा सवाल: आखिर कांग्रेस के वोट गए कहां?

चुनाव परिणाम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब महागठबंधन के पास पर्याप्त संख्या थी तो कांग्रेस उम्मीदवार को अपेक्षित वोट क्यों नहीं मिले? क्या सहयोगियों ने साथ छोड़ा या कांग्रेस के भीतर ही सेंध लगी? इस हार ने न केवल कांग्रेस की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि झारखण्ड में महागठबंधन की एकजुटता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।अब निगाहें इस बात पर हैं कि कांग्रेस अपनी हार का ठीकरा सहयोगियों पर फोड़ती रहेगी या क्रॉस वोटिंग की असली कहानी सामने आएगी।

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