सात फेरों से ठीक पहले थमी शादी…जेल परिसर के शिव मंदिर में पहुंचा प्रशासन, अधूरी रह गईं वैवाहिक रस्में–

–कोर्ट मैरिज के बाद धार्मिक रीति-रिवाज से विवाह करने पहुंचे थे दूल्हा-दुल्हन, प्रशासन ने नियमों का हवाला देकर रुकवाया समारोह

धनबाद।धनबाद मंडल कारा परिसर स्थित शिव मंदिर में शुक्रवार को एक बेहद अनोखा और हैरान करने वाला मामला सामने आया। कोर्ट मैरिज के बाद हिंदू रीति-रिवाज से विवाह की रस्में पूरी करने पहुंचे एक जोड़े की शादी उस वक्त बीच में ही रुक गई, जब सात फेरों से ठीक पहले जेल प्रशासन मौके पर पहुंच गया। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद विवाह की रस्में अधूरी छोड़नी पड़ीं और दोनों पक्षों को मंदिर परिसर से बाहर जाना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, बिहार के आरा निवासी दिलीप यादव और धनबाद के पाथरडीह की रहने वाली कंचन पहले ही कोर्ट मैरिज कर चुके हैं। सामाजिक और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करने के उद्देश्य से दोनों परिवार धनबाद मंडल कारा परिसर स्थित शिव मंदिर पहुंचे थे। दोपहर करीब डेढ़ बजे मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह की रस्में शुरू हुईं। परिजन मौजूद थे और माहौल पूरी तरह मांगलिक था।

इसी दौरान जेल प्रशासन को मंदिर परिसर में विवाह समारोह आयोजित होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही जेलकर्मी और अधिकारी मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने बिना पूर्व अनुमति के जेल परिसर में निजी आयोजन किए जाने पर आपत्ति जताई और विवाह समारोह को तत्काल रोक दिया।

बताया जाता है कि उस समय दूल्हा-दुल्हन सात फेरे लेने की तैयारी में थे। अचानक प्रशासन के पहुंचने से वहां मौजूद लोगों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। दोनों पक्षों ने अधिकारियों से बातचीत कर रस्में पूरी करने की अनुमति देने का अनुरोध किया, लेकिन प्रशासन ने नियमों का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया।

मौके पर मौजूद अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जेल परिसर के भीतर किसी भी प्रकार के निजी आयोजन के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति विवाह समारोह आयोजित किए जाने के कारण प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। अधिकारियों ने पुरोहित को भी नियमों के पालन की सलाह दी और परिजनों से परिसर खाली करने को कहा।दूल्हे दिलीप यादव का कहना है कि वे और कंचन पहले ही कानूनी रूप से पति-पत्नी बन चुके हैं। शिव मंदिर में केवल पारंपरिक हिंदू विवाह संस्कार की रस्में पूरी की जा रही थीं। लेकिन प्रशासन के हस्तक्षेप के कारण विवाह अधूरा रह गया।

वहीं दुल्हन पक्ष के लोगों ने इस घटनाक्रम पर निराशा जताते हुए कहा कि अब किसी अन्य मंदिर में जाकर शेष वैवाहिक रस्में पूरी की जाएंगी।जेल परिसर के मंदिर में शुरू हुई शादी का सात फेरों से ठीक पहले रुक जाना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। लोगों के बीच यह मामला दिनभर चर्चा में रहा कि कानूनी रूप से शादीशुदा जोड़े को धार्मिक रस्में पूरी करने से पहले ही समारोह क्यों रोकना पड़ा। हालांकि प्रशासन का कहना है कि नियमों का पालन सर्वोपरि है और बिना अनुमति किसी भी प्रकार के आयोजन की इजाजत नहीं दी जा सकती।

error: Content is protected !!