गुमला:भारतमाला प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे ग्रामीणों ने कंपनी के मुंशी को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा…

 

गुमला।झारखण्ड के गुमला जिले के लट्ठा बरटोली गांव में भारतमाला सड़क परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है।सोमवार को हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए, जब सड़क निर्माण कार्य शुरू कराने पहुंचे शिवालया कंपनी के मुंशी की ग्रामीणों ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी सहमति के बिना जबरन सड़क निर्माण कराया जा रहा है, जिसका वे लगातार विरोध कर रहे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, भारतमाला परियोजना के तहत सड़क निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए सोमवार को शिवालया कंपनी की गाड़ियां लट्ठा बरटोली गांव पहुंचीं।जैसे ही निर्माण कार्य की तैयारी शुरू हुई, ग्रामीण बड़ी संख्या में वहां जुट गए और विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया।ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जमीन सड़क निर्माण के लिए नहीं देना चाहते हैं। उनका आरोप है कि कंपनी प्रशासन की मदद से जबरन निर्माण कार्य शुरू कराना चाहती है। इसी बात को लेकर गांव के लोगों में भारी नाराजगी है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विरोध के दौरान ग्रामीणों ने कंपनी के मुंशी सहित कई कर्मचारी को घेर लिया देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई और लोगों ने उसकी पिटाई शुरू कर दी।बताया जा रहा है कि मुंशी को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। इस दौरान उसके कपड़े भी फाड़ दिए गए।घटना के बाद किसी तरह वह वहां से जान बचाकर भागा।बताया जा रहा है कि यह पूरी घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई। हालांकि, स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की गई, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा काफी ज्यादा था।

इस विरोध-प्रदर्शन में गांव की महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।महिलाओं ने सड़क निर्माण कार्य का जमकर विरोध किया और कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की।ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण से उनकी खेती और जमीन प्रभावित होगी, जिससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है।महिलाओं ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों पर उचित फैसला नहीं होता, तब तक वे किसी भी हालत में सड़क निर्माण नहीं होने देंगी।

ग्रामीणों का विरोध पिछले कई दिनों से जारी है।रविवार को भी गांव के लोगों ने सड़क निर्माण स्थल पर धानरोपनी कर और हल जोतकर अपना विरोध दर्ज कराया था।ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन उनकी खेती का मुख्य आधार है और वे इसे किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहते। ग्रामीण लगातार प्रशासन और कंपनी से बातचीत की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। इसी कारण लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।घटना के बाद प्रशासन के सामने स्थिति को संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। फिलहाल गांव के लोग सड़क निर्माण स्थल पर डटे हुए हैं और निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है।

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