’10 लाख दो, नौकरी लो’… JSSC के नाम पर ठगी करने वाला शातिर ठग रंगे हाथ गिरफ्तार

सरायकेला।सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये ऐंठने वाले एक बड़े गिरोह का सरायकेला-खरसावां जिले के चौका थाना क्षेत्र में पर्दाफाश हुआ है। बड़ामटांड़ गांव में गुरुवार को ग्रामीणों की सतर्कता और एक अभ्यर्थी की सूझबूझ से कथित ठग रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपी पीजीटी सहायक आचार्य के पद पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर 10 लाख रुपये लेने गांव पहुंचा था, लेकिन उससे पहले ही पूरा खेल पलट गया।
‘10 लाख दो… नौकरी पक्की’ का झांसा
पीड़ित अभ्यर्थी के मुताबिक बुधवार को उसके मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को जेएसएससी का वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उसकी पीजीटी सहायक आचार्य पद पर नियुक्ति तय हो चुकी है। शर्त सिर्फ इतनी थी कि तत्काल 10 लाख रुपये की व्यवस्था करनी होगी। इतना ही नहीं, आरोपी ने दबाव बनाते हुए कहा कि पैसे नहीं दिए तो मौका किसी दूसरे अभ्यर्थी को दे दिया जाएगा।लेकिन इस बार शिकार बनने की बजाय अभ्यर्थी ने चालाकी दिखाई। उसने पैसे देने का भरोसा दिलाया और आरोपी को गुरुवार को बड़ामटांड़ गांव बुला लिया। साथ ही पूरे मामले की जानकारी ग्रामीणों और स्थानीय लोगों को पहले ही दे दी। जैसे ही युवक गांव पहुंचा, पहले से तैयार ग्रामीणों ने उसे दबोच लिया और चौका पुलिस के हवाले कर दिया।
पूछताछ में खुला ठगी का खतरनाक मॉडल
प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस के सामने ठगी का चौंकाने वाला तरीका सामने आया। आरोपी बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का भरोसा देकर उनसे दो हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक और सभी मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र अपने पास रखवा लेता था। इसके बाद फर्जी जॉइनिंग लेटर दिखाकर 10 लाख रुपये नकद लेने की तैयारी की जाती थी। इससे संकेत मिलता है कि गिरोह लंबे समय से योजनाबद्ध तरीके से युवाओं को निशाना बना रहा था।
बैग से निकले ओरिजिनल सर्टिफिकेट और फर्जी दस्तावेज
जब पुलिस ने आरोपी के बैग की तलाशी ली तो कई चौंकाने वाले दस्तावेज मिले। बैग से जेएसएससी भर्ती से जुड़े फॉर्म, विभिन्न जिलों के अभ्यर्थियों के मूल प्रमाण पत्र और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए। इन कागजातों के आधार पर पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अब तक कितने युवाओं को इस गिरोह ने अपने जाल में फंसाया।
राज्यभर में फैले नेटवर्क की आशंका
चौका थाना पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। उसके मोबाइल की कॉल डिटेल्स और संपर्कों की जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि यह किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर सक्रिय एक संगठित रैकेट हो सकता है। जांच एजेंसियां अब गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश में जुट गई हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी का यह नेटवर्क झारखण्ड के कई जिलों तक फैला हुआ है? पुलिस की आगे की जांच से कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

