देवघर:नशा छुड़ाने गए 14 साल के मासूम की संदिग्ध मौत,परिजनों का आरोप- पीट-पीटकर मार डाला

देवघर।नशा छुड़ाकर जिस जिंदगी को संवारने की उम्मीद जगी थी, वही उम्मीद एक 14 साल के मासूम के लिए मौत का फंदा बन गई। माता-पिता ने भारी मन और ढेरों उम्मीदों के साथ अपने जिगर के टुकड़े को जिस चौखट पर सौंपा था, वहां से सिर्फ उसका बेजान शव बाहर निकला।देवघर के जसीडीह थाना क्षेत्र (डाबरग्राम पुलिस लाइन के पास, बीएड कॉलेज के सामने) स्थित ‘देवघर रुद्रा फाउंडेशन’ नशा मुक्ति केंद्र नाबालिग की मौत हो गई है।
नगर थाना क्षेत्र के झोसागढ़ी निवासी परिजनों ने महज चार-पांच दिन पहले ही अपने 14 वर्षीय बेटे को नशे की लत से निजात दिलाने के लिए इस सेंटर में भर्ती कराया था। उन्हें लगा था कि कुछ हफ्तों के अनुशासन और इलाज के बाद उनका बच्चा वापस सामान्य जिंदगी में लौट आएगा।लेकिन उन्हें क्या पता था कि सुधार गृह का दावा करने वाला यह केंद्र बर्बरता का अड्डा साबित होगा।किशोर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर मिलते ही परिजन केंद्र पहुंचे। परिजनों के सब्र का बांध टूट गया जब उन्होंने मासूम के शव को देखा। मृतक की पीठ और शरीर के पिछले हिस्से पर गहरी चोटों के लाल-काले निशान स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। परिजनों का साफ कहना है कि सुबह के वक्त किशोर के साथ बेदर्दी से मारपीट की गई, जिससे उसकी जान चली गई। आरोप है कि घटना के तुरंत बाद सेंटर के प्रबंधकों ने मामले को दबाने और लीपापोती करने की नाकाम कोशिश की।
घटना के बाद सेंटर में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों के भारी आक्रोश और हंगामे को देखते हुए जसीडीह थाने से एसआई रामानुज सिंह पुलिस टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे।पुलिस ने आक्रोशित परिजनों को कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया। शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने सेंटर के एक कर्मचारी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि संचालक और अन्य कर्मियों की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है।
परिवार के लोगों का कहना था कि एक 14 साल का बच्चा, जो सिर्फ सही मार्गदर्शन का हकदार था, वह आज व्यवस्था और कथित नशा मुक्ति केंद्रों की आड़ में चल रहे काले कारनामों की बलि चढ़ गया। अब देखना यह है कि कानून इस मासूम को कब तक इंसाफ दिला पाता है।

