राँची के सेंट्रल जेल में महिला कैदी के साथ यौन शोषण और गर्भवती होने के दावे से मचा हड़कंप, राँची के डीसी ने दिए जांच के आदेश…
राँची।राँची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में एक महिला कैदी के कथित यौन शोषण और गर्भवती होने के मामले ने राज्य की जेल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। अब राँची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं।उपायुक्त ने कहा है कि जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन दोनों स्तरों पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।महिला कैदी की ओर से जेल अधीक्षक पर शारीरिक और मानसिक शोषण करने और गर्भवती करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। डीसी ने कहा कि आरोपों की सत्यता और तथ्यों की पुष्टि के लिए जांच आवश्यक है।मामले की जांच एडीएम (विधि-व्यवस्था) और एसडीएम स्तर के अधिकारियों को सौंपी गई है।हालांकि उन्होंने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट नेगेटिव आई है।
इधर,बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार में बंद एक महिला बंदी के गर्भवती होने के मामले को लेकर झारखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) गंभीर है।विभिन्न अखबारों में प्रकाशित खबरों पर संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति-सह झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष सुजीत नारायण प्रसाद ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), रांची को मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने तथा पीड़ित महिला को तत्काल विधिक सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।निर्देशानुसार विशेष जांच टीम का गठन किया गया। टीम में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, डालसा सचिव, महिला एलएडीसी चीफ एवं अन्य महिला एलएडीसी शामिल थे।यह टीम जांच के लिए बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार पहुंची।जांच के दौरान टीम ने पाया कि जेल के किसी भी वार्ड में शिकायत पेटी नहीं लगाई गई थी।इस पर टीम ने नाराजगी जताई और जेल अधीक्षक को दो दिनों के भीतर सभी वार्डों में शिकायत पेटी लगाने का निर्देश दिया गया।टीम ने पीड़ित महिला, जेल पीएलवी तथा जेल चिकित्सक का बयान दर्ज किया। टीम ने सभी वार्डों का निरीक्षण कर मामले की जांच गंभीरता से की।टीम ने जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर झालसा को भेज दी है। डालसा सचिव राकेश रौशन ने बताया कि पीड़ित महिला को विधिक सहायता योजना के तहत पैनल से निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया गया है। साथ ही जेल प्रशासन को महिला बंदी की समुचित देखभाल सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है।
बता दें इस पूरे मामले को लेकर झारखण्ड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं।उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयान में दावा किया कि होटवार जेल में एक महिला बंदी के साथ लंबे समय तक शोषण किया गया और वह गर्भवती हो गई। मरांडी ने आरोप लगाया कि जेल प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है।उन्होंने राज्य सरकार से पूछा कि आखिर जेल जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली जगह में ऐसी घटना कैसे हो सकती है। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
महिला कैदी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।विपक्ष का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल जेल सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता होगी, बल्कि मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला भी बनेगा।फिलहाल प्रशासनिक जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

