48 घंटे में खुला ब्लाइंड मर्डर का राज: सगे भाई ने ही रची थी मौत की साजिश, भाई-भाभी समेत चार गिरफ्तार

चतरा।झारखण्ड के चतरा जिले के हंटरगंज थाना क्षेत्र के सेलवार गांव में हुए चर्चित देवचरण यादव हत्याकांड का पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। जिस मौत को शुरुआत में रहस्यमयी माना जा रहा था, वह अब एक सुनियोजित पारिवारिक साजिश के रूप में सामने आई है। पुलिस ने इस मामले में मृतक के सगे भाई, भाभी, भतीजे और भतीजी को गिरफ्तार किया है।
सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में एसडीपीओ सन्नी वर्धन ने बताया कि 28 जून को सेलवार गांव निवासी देवचरण यादव का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। टीम ने घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों, तकनीकी जांच और संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ा और हत्या की गुत्थी सुलझा ली।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि देवचरण यादव की गला दबाकर हत्या की गई थी। हत्या के बाद आरोपियों ने इसे सामान्य मौत का रूप देने की कोशिश की, लेकिन वैज्ञानिक जांच और तकनीकी साक्ष्यों ने उनकी पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।
पुलिस ने मृतक के भाई कामदेव यादव, भाभी बिंदु देवी, भतीजे विकास यादव और भतीजी प्रियंका देवी को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक पूछताछ में चारों ने हत्या में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली है।
पुलिस के अनुसार, परिवार में लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसके अलावा अवैध संबंधों को लेकर भी पारिवारिक तनाव बना हुआ था। शुरुआती जांच में इन्हीं कारणों को हत्या की मुख्य वजह माना गया है। पुलिस का कहना है कि इन विवादों के चलते देवचरण यादव की हत्या की साजिश रची गई और फिर गला दबाकर उनकी जान ले ली गई।
एसडीपीओ ने बताया कि गिरफ्तार सभी आरोपियों को पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा जा गया है।। साथ ही इस बात की भी जांच जारी है कि इस वारदात में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। यदि जांच में किसी और की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी साक्ष्यों और त्वरित कार्रवाई की बदौलत इस ब्लाइंड मर्डर केस का महज दो दिनों में खुलासा संभव हो सका। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिले में गंभीर अपराधों के मामलों में तेज जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की नीति आगे भी जारी रहेगी।

