पलामू में अंधविश्वास का तांडव: ओझा की ‘रहस्यमय राख’ ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार, 10 दिनों में 5 मौतें, 3 अब भी रिम्स में वेंटिलेटर पर..

 

पलामू।झारखण्ड के पलामू जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने पूरे स्वास्थ्य महकमे और पुलिस प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव में एक हंसता-खेलता परिवार महज 10 दिनों के भीतर पूरी तरह तबाह हो गया।एक ही घर से एक-एक कर 5 अर्थियां उठीं, और मौत का यह खूनी सिलसिला अब भी थमने का नाम नहीं ले रहा है।आखिरकार इस ‘रहस्यमय मौत’ के पीछे कौन सी काली परछाई है? क्या यह कोई जानलेवा बीमारी है या फिर अंधविश्वास के चक्कर में परोसा गया ‘धीमा जहर’?

​मौत का यह तांडव 19 जून से शुरू हुआ और देखते ही देखते पूरे परिवार को निगल गया। सबसे पहले 19 जून को परिवार के मुखिया कुलदीप महतो की मौत हुई।इसके अगले ही दिन 20 जून को उनकी बेटी बबीता कुमारी ने दम तोड़ दिया।इसके बाद मौत का सिलसिला थमा नहीं, 26 जून को दूसरी बेटी इन्दु कुमारी की जान चली गई, 28 जून को बहू श्वेता कुमारी ने दम तोड़ा और 29 जून को बेटा नकुल महतो भी जिंदगी की जंग हार गया।बहू और बेटे की मौत राँची के रिम्स अस्पताल में हुई है।

​इस वक्त परिवार के अन्य सदस्य कुलदीप महतो की पत्नी लाखो देवी, एक बेटा और पोता भी राँची के रिम्स में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। इस रहस्यमय बीमारी में मरीजों का पूरा शरीर बुरी तरह सूज जाता है और कुछ ही घंटों में उनकी मौत हो जा रही है।

​जब स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इस मामले की परतों को उखाड़ना शुरू किया, तो जो सच सामने आया वह बेहद चौंकाने वाला और डरावना था। जांच में पता चला कि पहली दो मौतों के बाद यह परिवार डॉक्टरों के पास जाने के बजाय लेस्लीगंज के पूर्णाडीह इलाके में झाड़-फूंक करवाने चला गया था।चौंकाने वाली बात यह है कि ढोंगी ओझा-तांत्रिक के चक्कर में पड़कर पूरा परिवार काफी समय से एक खास तरह की ‘राख’ यानी भभूत खा रहा था। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इस परिवार को इलाज के लिए 4 बार रेस्क्यू किया, लेकिन अंधविश्वास में अंधा हो चुका यह परिवार बार-बार अस्पताल से भागकर झाड़-फूंक कराने पहुंच जाता था। पलामू के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि हमारी टीमें सिक्का गांव और पूर्णाडीह में कैंप कर रही हैं और उस ‘रहस्यमय राख’ के सैंपल कलेक्ट किए जा रहे हैं।

​इस सामूहिक मौत कांड पर मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज के डॉ. आर. के. रंजन ने एक बेहद सनसनीखेज आशंका जताई है। उनके मुताबिक, यह खतरनाक ‘ड्रॉप्सी’ बीमारी हो सकती है। आशंका है कि परिवार जिस सरसों तेल का इस्तेमाल खाने में कर रहा था, उसमें मिलावट थी। सरसों के तेल में ‘आर्जीमोन’ (सत्यानाशी के बीज) की मिलावट होने पर ड्रॉप्सी बीमारी होती है, जिससे शरीर सूज जाता है और मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण इंसान की मौत हो जाती है। इसीलिए अब परिवार के खाने-पीने के सामान और तेल की भी जांच की जा रही है।

​फिलहाल शुरुआती तीन मृतकों के शव का पोस्टमार्टम कराकर उनके विसरा के सुरक्षित नमूनों को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) जांच के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है।पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पलामू के इस गांव में चल रहे अंधविश्वास के इस खूनी खेल का जिम्मेदार कौन है? क्या वो ढोंगी ओझा सलाखों के पीछे पहुंचेगा, जिसने इलाज के नाम पर इस परिवार को ‘राख’ का जहर थमाया?

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