विदेशी हथियार मामले में प्रफुल्ल मालाकार की जमानत बरकरार,सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए की याचिका खारिज की…

 

राँची।सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी हथियारों की तस्करी और कब्जे के मामले में सजायाफ्ता प्रफुल्ल मालाकार को बड़ी राहत दी है। बुधवार को जस्टिस जेके माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने झारखण्ड हाईकोर्ट द्वारा मालाकार को दी गई जमानत के फैसले को सही ठहराते हुए, इसके खिलाफ दायर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया है।मामले की सुनवाई के दौरान प्रफुल्ल मालाकार की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन ने वर्चुअल माध्यम से पक्ष रखा।उन्होंने अदालत को बताया कि राँची स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने 20 दिसंबर 2024 को उनके मुवक्किल को अधिकतम 15 वर्ष की सजा सुनाई थी। बचाव पक्ष ने जमानत के समर्थन में मुख्य रूप से दो बातें रखीं। प्रफुल्ल मालाकार पहले ही लगभग चार वर्ष सात माह तक न्यायिक हिरासत में रह चुका है। झारखण्ड हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों और हिरासत की अवधि को देखते हुए ही 16 सितंबर 2025 को जमानत प्रदान की थी, जो पूरी तरह न्यायोचित है।

यह मामला अगस्त 2012 से जुड़ा है, जो अपनी नाटकीय गिरफ्तारी और बरामदगी के दावों के कारण चर्चा में रहा था। एनआईए का दावा था कि प्रफुल्ल मालाकार को सिलोदर के जंगलों से गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से एक M-16 अमेरिकी राइफल बरामद हुई थी, जिसके बारे में कहा गया कि इस प्रकार के घातक हथियारों का इस्तेमाल वियतनाम युद्ध के दौरान किया गया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मालाकार को 29 अगस्त 2012 को पेश किया गया था।हालांकि, बचाव पक्ष का आरोप है कि उसे 24 अगस्त 2012 को ही दानापुर से उठा लिया गया था और चार दिनों तक अवैध हिरासत में रखा गया। गिरफ्तारी के समय मालाकार की भाभी ने स्थानीय अदालत में गुहार लगाई थी कि पुलिस उनके देवर को ले गई है पर पेश नहीं कर रही।इसके बाद अदालत द्वारा नोटिस जारी होने पर ही उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

राँची स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए मालाकार को दोषी करार दिया था और सजा सुनाई थी। इस सजा के खिलाफ प्रफुल्ल ने झारखण्ड हाईकोर्ट में अपील दायर की, जहां से उसे 16 सितंबर 2025 को जमानत मिल गई।एनआईए ने हाईकोर्ट के इसी आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

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