झारखण्ड में ‘सुरक्षा’ पर सियासत: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने लौटाए 16 जवान और 3 गाड़ियां, अब इरफान अंसारी ने दे दी नसीहत

 

राँची।झारखण्ड सरकार में सब कुछ ठीक नहीं है।इसकी एक और तस्वीर तब सामने आई, जब राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी पूरी सरकारी सुरक्षा व्यवस्था ही वापस कर दी। मंत्री ने न सिर्फ अपने साथ तैनात 16 सुरक्षा जवानों को पुलिस मुख्यालय लौटा दिया, बल्कि उनकी आवाजाही के लिए उपलब्ध कराई गई तीन बोलेरो गाड़ियां भी वापस कर दीं। इस फैसले के बाद सत्ता के गलियारों में हलचल तेज हो गई है और सरकार के भीतर समन्वय को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

एक अतिरिक्त गाड़ी मांगी, मिला नोटिस… फिर लिया बड़ा फैसला

जानकारी के मुताबिक, वित्त मंत्री ने 29 जून को पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखकर सुरक्षा में तैनात जवानों के आवागमन के लिए एक अतिरिक्त वाहन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि मौजूदा व्यवस्था में 16 सुरक्षा कर्मियों के आने-जाने में व्यावहारिक दिक्कतें हो रही हैं।

लेकिन मंत्री की मांग पर कोई निर्णय नहीं हुआ। इसी बीच वित्त विभाग के संयुक्त सचिव ने पुलिस मुख्यालय के एक पत्र का हवाला देते हुए मंत्री के आप्त सचिव को नोटिस जारी कर सुरक्षा में लगी एक गाड़ी तत्काल वापस करने को कहा। बताया जाता है कि इसी नोटिस से नाराज होकर वित्त मंत्री ने पूरी सुरक्षा व्यवस्था ही लौटाने का फैसला कर लिया।

‘ऊपर वाले पर भरोसा है, सुरक्षा की जरूरत नहीं’

अपने फैसले की पुष्टि करते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि उन्होंने सुरक्षा गार्डों और वाहनों को वापस कर दिया है। हालांकि उन्होंने इस फैसले के विस्तृत कारण बताने से इनकार किया।उन्होंने कहा, “मुझे ऊपर वाले पर पूरा भरोसा है। मैं पहले भी बूढ़ा पहाड़ जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में बिना सुरक्षा के जाता रहा हूं।”साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले का मुख्यमंत्री से कोई संबंध नहीं है। यह मामला उनके, वित्त विभाग और पुलिस विभाग के बीच का है।

सरकार के भीतर मतभेद आए सामने, इरफान अंसारी ने दी सलाह

वित्त मंत्री के फैसले के कुछ ही घंटों बाद सरकार के भीतर से अलग राय भी सामने आ गई। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राधाकृष्ण किशोर राज्य के वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं। ऐसे संवेदनशील मामले को सार्वजनिक करने के बजाय उन्हें मुख्यमंत्री से सीधे बातचीत करनी चाहिए थी।

इरफान अंसारी ने कहा कि हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री सहित सभी वरिष्ठ मंत्री मौजूद थे। यदि वित्त मंत्री को सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई शिकायत थी तो वह कैबिनेट में यह मुद्दा उठा सकते थे। इस तरह के आंतरिक मामलों के सार्वजनिक होने से सरकार की छवि प्रभावित होती है।हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वित्त मंत्री की सुरक्षा का विषय गंभीर है और इस पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाना चाहिए।

सुरक्षा से ज्यादा सिस्टम पर उठे सवाल

वित्त मंत्री के इस कदम ने सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा इस बात की है कि एक संवैधानिक पद पर बैठे मंत्री की ओर से अतिरिक्त वाहन की मांग किए जाने के बाद भी यदि समय पर निर्णय नहीं लिया गया और बाद में वाहन लौटाने का नोटिस जारी कर दिया गया, तो यह सरकार और प्रशासन के बीच समन्वय की स्थिति को भी उजागर करता है।

फिलहाल इस पूरे मामले पर पुलिस मुख्यालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की है कि क्या सरकार इस विवाद को आंतरिक स्तर पर सुलझाएगी या यह मामला आगे और तूल पकड़ेगा।

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