रिश्तों का कत्ल: गुमला में ‘असुरक्षा की भावना’ ने बहन को बनाया कातिल, 7 साल के मासूम भाई का पत्थर से कूचा सिर…

गुमला।झारखण्ड के गुमला जिले से एक ऐसी खौफनाक वारदात सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और खून के रिश्तों को तार-तार कर दिया है। रायडीह थाना क्षेत्र के कांसीर जामटोली गांव में बीते 15 जून को हुए 7 वर्षीय मासूम नवीन कुमार सिंह के ‘अंधे कत्ल’ का पुलिस ने 72 घंटे के भीतर सनसनीखेज खुलासा कर दिया है।​मासूम नवीन का हत्यारा कोई बाहरी नहीं, बल्कि उसकी अपनी ही 14 साल की सगी नाबालिग बहन निकली। माता-पिता के कथित कम प्यार और भाई के प्रति उपेक्षा की भावना ने एक नाबालिग के भीतर इस कदर नफरत का जहर घोला कि उसने अपने ही भाई को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने आरोपी किशोरी को गिरफ्तार कर बाल सुधार गृह (रिमांड होम) भेज दिया है।

​घटना की शुरुआत 15 जून को हुई, जब हेमंत  के 7 वर्षीय बेटे नवीन का शव गांव के पास के जंगल में क्षत-विक्षत हालत में मिला। मासूम का चेहरा और सिर पत्थर से कुचला हुआ था। इस खौफनाक मंजर को देखकर पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रायडीह पुलिस ने तुरंत विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर तफ्तीश शुरू की।

​शुरुआत में पुलिस को भटकाने की हर मुमकिन कोशिश की गई। लेकिन जब SIT ने परिवार, रिश्तेदारों और ग्रामीणों से कड़ियां जोड़ना शुरू किया, तो शक के घेरे में मृतक की बड़ी बहन आ गई। महिला पुलिस विंग की मौजूदगी में जब किशोरी से मनोवैज्ञानिक तरीके से गहन पूछताछ की गई, तो वह अपने आंसुओं और गुनाह को छुपा नहीं सकी। वह फूट-फूटकर रोने लगी और जो सच उगला, उसने पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए।

​आरोपी किशोरी ने कुबूल किया कि उसके बाल मन में लंबे समय से माता-पिता के प्रति गहरी नाराजगी थी। उसे लगता था कि घर के सभी लोग उसके छोटे भाई नवीन को ही सबसे ज्यादा प्यार और अहमियत देते हैं। भाई की हर जिद पूरी होती थी, जबकि उसे छोटी-छोटी बातों पर डांट और उपेक्षा झेलनी पड़ती थी। यही ईर्ष्या धीरे-धीरे खौफनाक नफरत में बदल गई।

​15 जून के दिन अपने खौफनाक इरादे को अंजाम देने के लिए बहन ने भाई को मोहरा बनाया औए ​बहला-फुसलाकर जंगल की ओर ले गई।सन्नाटा देखते ही उसने मासूम पर हमला कर दिया और बेरहमी से उसका गला घोंट दिया।भाई की मौत के बाद भी उसका दिल नहीं भरा। पहचान छुपाने और पुलिस को गुमराह करने के लिए उसने पास पड़े एक भारी पत्थर से मासूम के सिर और चेहरे को बुरी तरह कुचल दिया। वारदात को अंजाम देकर वह चुपचाप घर लौट आई और ऐसे बर्ताव करने लगी जैसे कुछ हुआ ही न हो।

​जिस कलाई पर रक्षा का धागा (राखी) बांधने की रीत है, उसी हाथ ने भाई की सांसें छीन लीं। इस खुलासे के बाद पूरे गांव के पैरों तले जमीन खिसक गई है। रायडीह पुलिस ने विधि सम्मत कार्रवाई करते हुए आरोपी किशोरी को किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) के तहत कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे रिमांड होम (बाल सुधार गृह) भेज दिया गया है। यह घटना आज के समाज और माता-पिता के लिए भी एक बड़ा सबक है कि बच्चों के बीच की आपसी ट्यूनिंग और उनके मानसिक तनाव को कभी नजरअंदाज न करें।

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