JSSC-CGL परीक्षा रद्द: हमने मेहनत से नौकरी पाई, दूसरों की गलती की सजा हमें क्यों? — प्रोजेक्ट भवन के बाहर सिलेक्टेड अभ्यर्थियों का जोरदार प्रदर्शन

राँची। राज्य सरकार द्वारा झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC-CGL) परीक्षा को अचानक रद्द किए जाने के निर्णय के बाद चयनित अभ्यर्थियों के बीच आक्रोश और हताशा का माहौल व्याप्त हो गया है। सबसे बड़ा झटका उन अभ्यर्थियों को लगा है जो चयन प्रक्रिया पूरी कर विभिन्न सरकारी विभागों में अपने पदों पर जॉइनिंग कर चुके थे और पिछले कई महीनों से सेवाएं दे रहे थे।मंगलवार को अपनी नौकरी की सुरक्षा, स्पष्ट नीति और न्याय की मांग को लेकर सैकड़ों प्रभावित अभ्यर्थियों ने धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन (सचिवालय) के मुख्य द्वार पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।
क्या है पूरा मामला?
सोमवार देर रात राज्य सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और धांधली के आरोपों के मद्देनजर पूरी परीक्षा प्रक्रिया को निरस्त (रद्द) करने की घोषणा कर दी।परीक्षा रद्द होते ही लगभग 2,000 चयनित कर्मियों की सेवाएं अचानक समाप्त मान ली गईं। महीनों से ईमानदारी से काम कर रहे इन कर्मचारियों के सामने रातों-रात रोज़गार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
अभ्यर्थियों का मुख्य रुख: ‘दोषियों को बाहर करो, निर्दोषों को नहीं’
प्रोजेक्ट भवन के समक्ष जुटे अभ्यर्थियों ने सरकार और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि अगर गड़बड़ी हुई है तो जांच एजेंसियां सीबीआई जांच करें और दोषियों को पहचानकर बाहर करें। जिन अभ्यर्थियों ने अपनी कड़ी मेहनत से परीक्षा पास की और 6-8 महीनों से निष्ठापूर्वक सेवा दी है, उन्हें किसी और के अपराध की सजा क्यों दी जा रही है?
प्रमुख मांगें:
सेवा निरंतरता: जब तक पूरी जांच प्रक्रिया संपन्न नहीं होती, तब तक चयनित कर्मचारियों के पदों को सुरक्षित रखते हुए उनकी सेवा जारी रखी जाए।
मौखिक नहीं, लिखित आदेश: केवल आंदोलन या राजनीतिक दबाव में आकर मौखिक रूप से नौकरी से बाहर न किया जाए; जो भी कार्रवाई हो, वह कोर्ट और कानून के दायरे में हलफनामे के साथ हो।
व्यक्तिगत जवाबदेही: यदि कोई अभ्यर्थी दोषी है तो उसे व्यक्तिगत रूप से बर्खास्त किया जाए, न कि पूरी चयन सूची रद्द की जाए।
प्रोजेक्ट भवन के बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
सचिवालय परिसर के बाहर बढ़ते जमावड़े को देखते हुए रांची पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन अलर्ट मोड पर नजर आया:
बैरिकेडिंग और पुलिस बल: मुख्य प्रवेश द्वारों पर बैरिकेड्स लगाकर अतिरिक्त पुलिस बल और महिला बल की तैनाती की गई।
ज्ञापन सौंपने की तैयारी: अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शासन व वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है।
आगे की चेतावनी
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार जल्द ही उनकी सेवा सुरक्षा को लेकर कोई ठोस, सकारात्मक व कानूनी कदम नहीं उठाती है, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और इस आंदोलन को पूरे राज्य स्तर पर और अधिक तीव्र करने के लिए बाध्य होंगे।

