झारखण्ड एटीएस अब सीआईडी के अधीन, डीजीपी का बड़ा आदेश; आतंकवाद और संगठित अपराध की जांच में बदलेगी कार्यप्रणाली..

 

राँची।झारखण्ड पुलिस व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा ने आदेश जारी कर आतंकवाद निरोधी दस्ता (ATS) को पूरी तरह अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के अधीन कर दिया है। इस संबंध में पूर्व में जारी सभी निर्देशों को निरस्त कर दिया गया है।

डीजीपी के आदेश के अनुसार, वर्ष 2015 में राज्य में आतंकवादी गतिविधियों, स्लीपर सेल और देशविरोधी ताकतों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से एटीएस का गठन किया गया था। बाद में संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी इसकी शक्तियों का विस्तार किया गया। अब एटीएस द्वारा दर्ज और अनुसंधान किए जाने वाले सभी मामलों की निगरानी, संचालन और जांच प्रक्रिया सीआईडी के निर्देशन में होगी।

नए आदेश के तहत एटीएस के सभी मामलों में अनुसंधानकर्ता और पर्यवेक्षक की नियुक्ति, प्रभार ग्रहण करने की प्रक्रिया, पर्यवेक्षण टिप्पणियां तथा प्रगति प्रतिवेदन जारी करने जैसे सभी कार्य सीआईडी की निर्धारित संचालन प्रक्रिया के अनुरूप किए जाएंगे। यानी आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की जांच अब सीधे सीआईडी के नियंत्रण में चलेगी।

हालांकि आतंकवादी गतिविधियों की रोकथाम, स्लीपर सेल का खुलासा, आतंकियों की गिरफ्तारी और विशेष अभियानों के संचालन में एटीएस अपनी सक्रिय भूमिका निभाती रहेगी। ऐसे अभियानों के दौरान एटीएस के पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक (ऑपरेशन) के निर्देशन में कार्य करेंगे।

डीजीपी ने एटीएस को उसके कार्यों और अभियानों से जुड़ी सूचनाओं को उच्च स्तर की गोपनीयता के साथ संचालित करने का निर्देश भी दिया है। माना जा रहा है कि इस फैसले से आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की जांच में बेहतर समन्वय, जवाबदेही और पेशेवर दक्षता सुनिश्चित होगी।

झारखण्ड में आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत बनाने के लिए एटीएस को अब सीआईडी के साथ एकीकृत ढांचे में काम करना होगा। सरकार और पुलिस मुख्यालय का मानना है कि इससे जांच और ऑपरेशन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा तथा संवेदनशील मामलों में कार्रवाई और अधिक प्रभावी बन सकेगी।

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