राँची में रेलवे के बड़े साहब सीबीआई के शिकंजे में..50 हजार रुपये घूस लेते दबोचा,डीसीएम से भी पूछताछ

 

राँची।राजधानी राँची के हटिया स्थित मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम)दफ्तर में बुधवार को अचानक हड़कंप मच गयी। दरअसल खबर ये है कि सीबीआई की एक टीम ने रेलवे चीफ कमर्शियल इंस्पेक्टर को 50 हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार किया है। आरोपी का नाम हिमांशु शेखर है। साथ ही सीनियर डीसीएम सूची सिंह से भी पूछताछ हो रही है। इससे पहले बिना किसी पूर्व सूचना के सीबीआई की टीम सुबह वहां पहुंच गयी।इसके बाद टीम के सभी सदस्य सबसे पहले सीधे वाणिज्य शाखा में गयी और वहां से संबंधित दस्तावेजों तथा रिकॉर्ड की पड़ताल में जुट गये।

जानकारी के मुताबिक सीबीआई को ठेकेदार अजय त्यागी ने लिखित शिकायत की थी कि उसका 8.50 लाख रुपये का बिल बकाया है।इस बिल के भुगतान के लिए चीफ कॉमर्शियल इंस्पेक्टर हिमांशु शेखर 50 हजार रुपये घूस मांग रहा है।शिकायतकर्ता ने यह भी बताया था कि आरोपी अफसर इस रकम में सीनियर डीसीएम की हिस्सेदारी होने की भी बात कर रहा है। सीबीआई ने इस शिकायत का सत्यापन किया और फिर मामला सही पाये जाने पर संबंधित अधिकारी को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

सीआईबी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि दिनांक: 25.03.2026,केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दक्षिण पूर्व रेलवे,राँची, झारखण्ड के मुख्य वाणिज्यिक निरीक्षक (CCI) को शिकायतकर्ता से 50,000 रुपये की रिश्वत मांगते और लेते हुए गिरफ्तार किया है।CBI ने 25.03.2026 को उक्त आरोपी के खिलाफ यह मामला दर्ज किया। आरोप है कि आरोपी मुख्य वाणिज्यिक निरीक्षक ने शिकायतकर्ता के लगभग 8.70 लाख रुपये के लंबित बिलों को पास करने के बदले, उन बिलों की कुल राशि का 10% रिश्वत के तौर पर मांगा था।CBI ने एक जाल बिछाया और आरोपी को शिकायतकर्ता से तय की गई रिश्वत की राशि (50,000 रुपये) की पहली किस्त मांगते और लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी के कार्यालय और आवासीय परिसरों में तलाशी जारी है।जांच जारी है।

 

सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से यह भी शिकायत मिल रही थी कि हटिया रेल मंडल में इमरजेंसी कोटा के वितरण में नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है।आरोप है कि जिन परिस्थितियों के लिए यह कोटा निर्धारित है, वहां इसका उपयोग नहीं हो रहा, बल्कि प्रभावशाली लोगों और बिचौलियों के जरिये इसका नजायज तरीके से फायदा उठाया जा रहा है।

जांच टीम पिछले कुछ महीनों में किये गये आवंटनों से जुड़े दस्तावेजों और कंप्यूटर में उपलब्ध डाटा की बारीकी से जांच कर रही है। इस दौरान संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों से प्रक्रिया को लेकर जानकारी भी ली जा रही है।यह जानने की कोशिश हो रही है कि कोटा देने के मानदंडों का पालन हुआ या नहीं।

पूरी जांच का केंद्र इस बात पर है कि कहीं रेलवे कर्मियों और बाहरी लोगों के बीच कोई समन्वय तो नहीं, जिसके जरिये पैसे लेकर टिकट उपलब्ध कराये जाते हों।अगर ऐसा पाया जाता है, तो यह गंभीर अनियमितता मानी जायेगी।

जैसे ही सीबीआई की टीम पहुंची, कार्यालय परिसर में आवाजाही पर नियंत्रण कर दिया गया और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी। फिलहाल जांच जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि कुछ अन्य अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।

error: Content is protected !!