डीजीपी से गुहार के बाद दर्ज हुई एफआईआर,लालपुर थाना प्रभारी पर दबाव का लगा आरोप, शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 13 लाख की ठगी का मामला–
–पीड़ित का आरोप.. शिकायत के बाद बुलाया गया थाना, आवेदन में बदलाव करने और पुलिस के खिलाफ लिखे अंश हटाने का बनाया दबाव
राँची।राँची में शेयर ट्रेडिंग सिखाने के नाम पर 13 लाख रुपये से अधिक की ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें पीड़ित को एक प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाना से लेकर डीजीपी तक गुहार लगानी पड़ी। लंबी शिकायत प्रक्रिया और दबाव के आरोपों के बाद आखिरकार लालपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामला अब आर्थिक अपराध के साथ-साथ पुलिस कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।पीड़ित ने मामले की उच्चस्तरीय जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी, ठगी गई पूरी राशि की वसूली और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
झूठे मुनाफे का लालच, लाखों की ठगी
पीड़ित ने बताया कि वर्ष 2024 में उसने लालपुर स्थित एक स्टॉक ट्रेनिंग संस्थान में 12,500 रुपये जमा कर दाखिला लिया था। संस्थान संचालक ने हर महीने 10 प्रतिशत मुनाफे का लालच देकर उसे निवेश के लिए प्रेरित किया.।भरोसे में आकर पीड़ित ने अलग-अलग माध्यमों से करीब 13.31 लाख रुपये निवेश कर दिए, लेकिन बाद में यह राशि वापस नहीं की गई।
चेक दिए, सभी बाउंस—फिर शुरू हुआ दबाव
राशि वापस मांगने पर आरोपियों ने करीब 13 लाख रुपये के पांच अलग-अलग चेक दिए, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर सभी चेक बाउंस हो गए। इसके बाद पीड़ित का आरोप है कि पैसे मांगने पर उसे धमकाया गया और दबाव बनाया गया, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
थाना में शिकायत, लेकिन एफआईआर के लिए करना पड़ा संघर्ष
पीड़ित का कहना है कि उसने पहले थाना स्तर पर शिकायत दी, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई. इसके बाद उसने डीजीपी और एसएसपी को लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की।आरोप है कि शिकायत के बाद जब उसे थाना बुलाया गया, तो आवेदन में बदलाव करने और पुलिस के खिलाफ लिखे अंश हटाने का दबाव बनाया गया।यहां तक कहा गया कि ऐसा नहीं करने पर केस दर्ज नहीं होगा।
डीजीपी तक पहुंची शिकायत, तब दर्ज हुई प्राथमिकी
लगातार प्रयास और उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने के बाद अंततः लालपुर थाना में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। पीड़ित ने इसे संगठित आर्थिक अपराध बताते हुए कहा है कि इसी तरह कई अन्य लोगों से भी ठगी की आशंका है।
जांच और कार्रवाई पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां आर्थिक ठगी का मामला है, वहीं दूसरी ओर थाना स्तर पर दबाव और एफआईआर दर्ज करने में देरी के आरोप भी सामने आए हैं।

