चाईबासा:सीआरपीएफ पहुंचे सारंडा,नक्सल विरोधी अभियान अब निर्णायक मोड़ पर…जवानों का बढ़ाया हौसला..

 

 

चाईबासा।झारखण्ड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित सारंडा के घने जंगलों में नक्सल विरोधी अभियान अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। शनिवार को सीआरपीएफ के स्पेशल डायरेक्टर जनरल (SDG) दीपक कुमार बालिबा कैंप पहुंचे और स्पष्ट संकेत दिया।उन्होंने कहा कि आने वाले एक महीने में अभियान को ठोस परिणाम तक पहुंचाया जाएगाहेलिकॉप्टर से बालिबा पहुंचे SDG दीपक कुमार का स्वागत सीआरपीएफ 193 बटालियन कैंप में किया गया।इस दौरान आईजी साकेत कुमार, एसटीएफ आईजी अनूप बिरथरे, डीआईजी राँची सतीश लिंडा, सीआरपीएफ डीआईजी विनोद कार्तिक, कमांडेंट ओम जी शुक्ला, द्वितीय कमान अधिकारी (अभियान) उमेश कुमार, एसपी अमित रेनू और मनोहरपुर डीएसपी जयदीप लकड़ा समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।करीब दो घंटे चली बैठक में ऑपरेशन की रणनीति, फोर्स की तैनाती और आगे की कार्रवाई पर विस्तार से चर्चा की गई।

मीडिया से बातचीत में एसडीजी दीपक कुमार ने शीर्ष नक्सली कमांडर मिसिर बेसरा का जिक्र करते हुए कहा कि उसके पास आत्मसमर्पण का विकल्प खुला है।उन्होंने साफ किया कि यदि वह अपने साथियों और हथियारों के साथ सरेंडर नहीं करता है, तो सुरक्षा बल कड़ी कार्रवाई करेंगे।अधिकारियों के मुताबिक अब तक चल रहे अभियान को और तेज किया जाएगा। सुरक्षा बल अब इंतजार की स्थिति में नहीं हैं और जल्द ही सघन सर्च ऑपरेशन के जरिए नक्सलियों पर दबाव बढ़ाया जाएगा।संकेत हैं कि आने वाले दिनों में कार्रवाई और आक्रामक हो सकती है।

हाल के अभियानों में सुरक्षा बलों को सफलता मिली है। जिससे जवानों का मनोबल बढ़ा है।अधिकारियों का मानना है कि इसी गति को बरकरार रखते हुए अभियान को निर्णायक अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।दौरे के दौरान SDG ने जवानों से सीधे बातचीत कर उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में डटे रहने के लिए जवानों की सराहना की और उन्हें आगामी अभियान के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।

बता दें कुछ दिन पहले बालिबा क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में नक्सली दस्ता घिरने के बावजूद जंगल का फायदा उठाकर निकल गया था। इस दौरान कुछ जवान घायल भी हुए थे।इसके बाद सुरक्षा बलों ने रणनीति को और मजबूत करने का निर्णय लिया है।दौरे के दौरान कुछ जवानों की तबीयत बिगड़ने की घटना भी सामने आई।जिन्हें तत्काल हेलिकॉप्टर से बेहतर इलाज के लिए राँची भेजा गया। इससे साफ है कि सारंडा जैसे दुर्गम इलाके में ऑपरेशन कई तरह की चुनौतियों से भरा हुआ है।

सारंडा में चल रहा नक्सल विरोधी अभियान अब अहम दौर में पहुंच गया है। सुरक्षा बलों की तैयारियों और वरिष्ठ अधिकारियों के संकेतों से साफ है कि आने वाले दिनों में कार्रवाई और तेज होगी। अब देखना यह है कि नक्सली आत्मसमर्पण का रास्ता अपनाते हैं या फिर जंगल में एक और बड़ी मुठभेड़ होती है।

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